
अब अनचाहे मासूम बच्चों को भी मिलेगा जीने अधिकार। ऋग्वेद ठाकुर दुवारा बिलासपुर में एक अनूठी पहल की गयी है। क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर व घुमारवीं अस्पताल के पास में आधुनिक सुविधाओं से पूर्ण एक शिशु पालना केंद्र स्थापित करने की व्यस्था की जा रही है। इस शिशु पालना केंद्र में अनचाहे शिशुओं के लिए झूला लगाया जाएगा। ऐसे माँ बाप जो अपने बच्चे के जन्म होते ही उसे इधर उधर फ़ेंक देते हैं, अब ऐसा करने की बजे वे अपने बच्चे को शिशु पालना केंद्र में छोड़ सकेंगे।
पंफलेट वितरण के जरिये इस सुविधा का प्रचार प्रसार किया जायेगा।
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2011 में "SOS Children’s Village" दुआर हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत में करीब २,००,००,००० बच्चे अनाथ हैं। इनमे अधिकतर बच्चे ऐसे हैं जिन्हें उनके माँ-बाप ने पैदा होने के उपरांत फेंक दिया। एक अनुमान के अनुसार 2021 तक भारत में २,४०,००,०००
अनाथ बच्चे होंगे।
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शिशु पालना केंद्र के अध्यक्ष ऋग्वेद ठाकुर ने कहा की इस यौजना का मुख्या उद्देश्य है की इधर-उधर फेंके गए बच्चों की मृत्यु को रोकना। समाज में हर बच्चे को जीने का अधिकार है। ऐसे में शिशु पालना केंद्र इधर-उधर फेंके गए बच्चों को सुरख्षा प्रदान करेगा।
शिशु पालना केंद्र में आधुनिक यंत्र लगाये जायेंगे जिससे माँ बाद दुआर पलना में बच्चे को छोड़ने के पांच मिनट के बाद अलार्म बजने लगेगा और शिशु पालना केंद्र के प्रभारी को इसका पता चल जायेगा। इससे बच्चे को तुरंत प्राथमिक चिकित्सा प्रदान की जा सकेगी और इसके उपरांत सम्बंधित जिला की बाल कल्याण समिति को इसकी सुचना दे दी जाएगी।
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जिला की बाल कल्याण समिति शिशु को हिमाचल प्रदेश बाल कल्याण परिषद द्वारा संचालित शिशु गृह को सौंप देगी। शिशु पालना योजना के अंतर्गत कमेटी के पदाधिकारियों को बिलासपुर और घुमारवीं परिसर के आस पास शिशु पालना केंद्र को स्थापित करने के लिए उचित स्थान का चयन करने का निर्देश दिया गया है।
यह यौजना दोनों अस्पताल में एक साथ शुरू किया जायेगा।
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इस अवसर पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी रमेश चंद सांख्यान, जिला कार्यक्रम अधिकारी वीके शर्मा, डीएसपी सोमदत्त, स्वास्थ्य विभाग से जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दीपेश बराल, गैर सरकारी सदस्यों में अध्यक्ष, बाल संरक्षण अनिल शर्मा, बाल संरक्षण अधिकारी गैर सरकारी शैली गुलेरिया, सदस्य नीरज बासु तथा अधिवक्ता सुनील शर्मा उपस्थित रहे।