
आप चाहे अपने नन्ही सी जान के लिए कितने भी जतन कर लें - लेकिन कुछ चीज़ें नियंत्रण से बहार होती हैं। और आप उनके विषय में कुछ भी नहीं कर सकती हैं। जैसे की आप मौसम को बदलने से नहीं रोक सकती हैं।
लेकिन आप अपने शिशु को खांसी से बचाने के लिए चार काम कर सकती हैं।
- पहला - अपने शिशु को सर्दी और जुकाम से बचाने के लिए हर संभव प्रयास। उसे गरम कपडे पहना के रखिये ताकि उसका शारीर ठण्ड से बचा रहे।
- दूसरा - अगर आप का शिशु फिर भी बीमार पड़ जाये तो इतनी जानकारी रखना की अपने शिशु की बीमारी में सही देख-रेख कर सके।
- तीसरा - अपने शिशु को सभी टिके समय पे लगवाएं।
- चौथा - अगर आप के शिशु की खांसी ठीक नहीं हो रही है और दस दिनों से ज्यादा हो गया है तो अपने बच्चे को तुरंत डाक्टर पे पास लेके जाएँ।

अगर इतना करने के लिए आप त्यार हैं तो आप का शिशु और बच्चों की तुलना में स्वस्थ भी रहेगा और उसका मानसिक और शारीरिक विकास भी बढ़िया होगा।
फिर भी,
कभी भी अपने बच्चे की तुलना दुसरे बच्चों से ना करें, क्योँकि हर बच्चे की शारीरिक बनावट भिन होती है और उसके विकास पे 'डी एन ए' (DNA) तथा सामाजिक और पारिवारिक परिवेश का भी प्रभाव पड़ता है।
कुछ सावधानियां बरत कर भी आप अपने शिशु को बीमार होने से बचा सकती हैं।
शिशु की खांसी को ठीक करने के लिए 15 आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे आप यहां पढ़ सकती हैं।
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इस लेख में आप निम्न बातें पढ़ेंगी:
- ~~~#1^^^शिशु को खांसी क्योँ होता है? @@@
- ~~~#2^^^शिशु का खांसी ठीक होने में कितना समय लगता है?@@@
- ~~~#3^^^शिशु के खांसी को ठीक करने का उपाय@@@
- ~~~#4^^^शिशु की खांसी को शांत करने का उपाय@@@
- ~~~#5^^^क्या शिशु खांसते - खांसते उलटी कर सकता है?@@@
- ~~~#6^^^शिशु को रात में खांसी ज्यादा क्योँ आती है?@@@
anchorlink[1]anchorcloseशिशु को खांसी क्योँ होता है?
व्यक्ति की श्वसन तंत्र (respiratory system) में तकलीफ होने पे शरीर खांस के प्रतिक्रिया करता है। खांसने से शिशु के श्वसन तंत्र (respiratory system) में जमा कफ (बलगम/mucus) साफ़ हो जाता है और शिशु ठीक से साँस लेने में सक्षम हो जाता है।

शिशु के शारीर की रोग प्रतिरोधक तंत्र वयस्क की तरह सुदृण नहीं होती है। इस वजह से बच्चे थोड़ा भी संक्रमण के संपर्क में आते ही बीमार पड़ जाते हैं। शिशु को खांसी तीन मुख्या कारणों से होती है:
- वातावरण में मौजूद धुल और परागकण के कारण
- जुकाम के विषाणु के संक्रमण के दुवारा
- शुष्क वातावरण के कारण
जिस वक्त मौसम में बदलाव आता है, ठीक उसी वक्त प्रकृति में भी बदलाव कुछ इस तरह आता है की वातावरण परागकण (pollen grain) से भर जाता है।
आप किसी भी तरह अंदाज से यह पता नहीं कर सकते हैं की वायु में परागकण (pollen grain) मौजूद है या नहीं।
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वायु में मौजूद परागकण (pollen grain) का वयस्कों पे ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन बच्चों का अलेर्जी के कारण बुरा हाल हो जाता है।
वातावरण में मौजूद परागकण (pollen grain) के संपर्क में आते ही बच्चे खांसने लगते हैं, उनका नाक बहने लगता है, और छाती में जकड़न (chest congestion) हो जाता है।
इसी प्रकार के लक्षण जुकाम के विषाणु के संक्रमण के कारण भी होता है - बस अंतर इतना है की विषाणु के संक्रमण की वजह से बच्चे को बुखार भी होता है।
सर्द मौसम में धूल और परागकण (pollen grain) की वजह से बच्चों का श्वसन तंत्र (respiratory system) संवेदनशील हो जाता है और शुष्क वातावरण के कारण उनकी इस स्थिति को और भी बुरी कर देती है। इसीलिए शिशु के कमरे में humidifier के इस्तेमाल से शिशु को बहुत आराम मिलता है।

अगर शिशु का जुकाम हवा में मौजूद धूल और परागकण (pollen grain) की वजह से तो कुछ दिनों के लिए शिशु के कमरे की खिड़कियां और दरवारे बंद कर दें।
इससे शिशु के कमरे में बहार से धूल और परागकण (pollen grain) अंदर नहीं आ पाएंगी और शिशु के स्थिति में बहुत सुधार होगा।
anchorlink[2]anchorcloseशिशु का खांसी ठीक होने में कितना समय लगता है?
शिशु की खांसी में सुधार होने में 1 से 2 सप्ताह तक का समय लग सकता है। लेकिन अगर शिशु की खांसी 10 दिनों के अंदर ठीक न हो तो डॉक्टर से परामर्श करें।
हो सकता है आप के शिशु को खांसी किसी दूसरी वजह से हो। कई गंभीर बीमारियोँ में भी खांसी के लक्षण दीखते हैं।

anchorlink[3]anchorcloseशिशु के खांसी को ठीक करने का उपाय
शिशु के खांसी को प्राकृतिक तरीके से ठीक किया जा सकता है। अगर आप निम्न उपायों पे ध्यान दें तो आप के शिशु की खांसी जल्दी ही ठीक हो सकेगी और आप का शिशु बीमार भी कम पड़ेगा।

- घर को साफ़ रखें - शिशु को धूल और गन्दगी से भी जुकाम होता है। जब मौसम बदलता है तो शिशु का श्वसन तंत्र (respiratory track) बहुत संवेदनशील हो जाता है। इस वक्त थोड़ा भी धूल के संपर्क में आने पे शिशु को खांसी और जुकाम हो जाता है। धूल और गन्दगी के संपर्क में रहने पे शिशु की खांसी और भी गंभीर रूप ले सकती है। इसीलिए घर को साफ़ रखिये ताकि आप का शिशु गन्दगी के संपर्क से दूर रहे। दो से तीन दिनों में ही आप पाएंगे के की आपके शिशु की खांसी ठीक होने लगी है।
- शिशु के हातों को साफ़ रखें - शिशु खेलते वक्त तरह तरह की चीज़ों को और सतहों को छूता है। इससे उसका हाथ में तरह तरह के जीवाणु और विषाणु पनपते हैं। खेलते वक्त शिशु समय-समय पे अपने चेहर को भी छूता है और कभी कभी अपने हातों को अपने मुँह में भी डाल लेते हैं। यही वजह है की बड़ों की तुलना में बच्चे सर्दी, जुकाम और बीमार ज्यादा पड़ते हैं। बच्चों के हातों को समय-समय पे धुलाते रहें ताकि उनके हाथ साफ़ रहें। घर में जो भी व्यक्ति बच्चों की देख-भल करे, बच्चों को पकडे, या गोदी उठाये, उसके लिए भी यह निवर्य हो की वो शिशु को छूने से पहले अपने हातों को अच्छी तरह से धो ले।

- शिशु को पर्याप्त मात्रा में सोने दें - जब शिशु सोता है, उस वक्त उसका शरीर अपनी सारी ऊर्जा का इस्तेमाल संक्रमण से लड़ने में करता है। जुकाम होने पे शिशु जितना ज्यादा सोयेगा, उसका जुकाम उतना जल्दी ठीक होगा।

- शिशु को दें Zinc और Vitamin C - दुनिया भर में हुए शोध में यह बात सामने आयी है की Zinc और Vitamin C दो ऐसे तत्त्व है, जो सर्दी और जुकाम में शरीर की सबसे ज्यादा मदद करते हैं। इसीलिए शिशु के आहार में ऐसी चीज़ें को समलित करें जिसमे Zinc और Vitamin C भरपूर मात्रा में हो।

anchorlink[4]anchorcloseशिशु की खांसी को शांत करने का उपाय
- शहद से बने cough syrup - विश्व स्तर पे हुए अनेक शोध में यह पता चला है की शहद से बने cough syrup खांसी को शांत करने में बहुत प्रभावी है। भारत में सदियोँ से शहद का इस्तेमाल किया जाता है गले के खराश और खांसी को ठीक करने में। बस इस बात का ध्यान रहे की अगर आप का शिशु एक साल से कम उम्र का है तो उसे शहद न दें। एक साल से कम उम्र के बच्चो की शहद देना वर्जित है क्योँकि इससे उसमे मौजूद जीवाणु (bacteria) से उन्हें botulism नामक बीमारी हो सकती है। यह उनके जान के लिए खतरना साबित हो सकता है।

- तरल आहार - शिशु को गरम तरल आहार दें जैसे की गरमा-गरम सूप। इससे शिशु के गले की सके हो जाएगी, उसे जुकाम से रहत मिलगा, और तरल शिशु के शरीर से संक्रमण को ख़त्म करने में मदद करेगा। सूप में एंटी-इन्फ़्लेमटॉरी गुण भी होता है। शिशु के शरीर में तरल की मात्रा बढ़ने से बलगम पतला हो जाता है और आसानी से बहार आ जाता है।

- Cool-mist humidifier - शिशु के कमरे में cool-mist humidifier का इस्तेमाल करें। ठण्ड के दिनों में कमरे में नमी का स्तर कम हो जाता है। इससे शिशु का नाक और गाला सूखने लगता है। यह एक मुख्या कारण है खांसी आने का। शिशु के कमरे में cool-mist humidifier के इस्तेमाल से कमरे में नमी का स्तर बढ़ जाता है और इस तरह से शिशु की खांसी को शांत करने में सहायता मिलता है। शिशु को बंद नाक (nose congestion) से रहत पहुँचाने के लिए आप शिशु को नेबुलाइजर (Nebulizer) भी दिला सकती हैं।

anchorlink[5]anchorcloseक्या शिशु खांसते - खांसते उलटी कर सकता है?
शिशु को खांसते - खांसते उलटी होना एक बहुत ही आम बात है। यही वजह है की जब बच्चों को सर्दी और जुकाम लगता है तो उलटी का दौर भी शुरू होता है। बच्चे खांसते खांसते उलटी कर देते हैं।

सबसे ज्यादा तकलीफ उस वक्त होती है जब बच्चे रात को सोते - सोते खांसी की वजह से उठ जाते है और खांसते - खांसते उलटी तक कर देते हैं। हालाँकि खांसते खांसते उलटी करना कोई विशेष चिंता की बात नहीं है, लेकिन फिर भी आप अपने बच्चे के डाक्टर से इस विषय पे बात अवश्य कर लें।
लेकिन कभी कभी इस तरह से खांसते खांसते उलटी कर देना गंभीर बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं।
anchorlink[6]anchorcloseशिशु को रात में खांसी ज्यादा क्योँ आती है?
शिशु के सर के पीछे वाले हिस्से में बलगम इकठा हो जाता है। व्यस्क नाक में इकठा बलगम को छिनक के निकल देते हैं, मगर बच्चे घोट जाते हैं। इससे वो दिन-भर इकठ्ठा होता रहता है और सोते वक्त लेटते ही सिर पीछे वाले हिस्से से बह के नाक में भर जाता है।

तकिये के इस्तेमाल से सिर की उचाई ज्यादा हो जाएगी और नाक खुली रहेगी - जिससे शिशु बिना तकलीफ के साँस ले सकेगा।
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