
जब तक बच्चा केवल माँ के दूध पे निर्भर रहता है तब तक बच्चे को उसके शारीर के विकास के लिए जरुरी सभी पोषक तत्त्व उसे माँ के दूध से मिल जाते हैं।
मगर जब बच्चा 6 महीने का हो जाता है और बच्चे मैं ठोस आहार की शुरुआत की जाती है तब ध्यान देने की आवश्यकता है की बच्चे को उसके आहार से वो सारे पोषक तत्त्व मिल सके जो उसके उचित विकास के लिए जरुरी है।
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अगर बच्चे को उसके active growth years में उसके आहार से सही मात्र में पोषक तत्त्व नहीं मिले तो बच्चे का विकास प्रभावित होगा और वो बच्चा जब युवा अवस्था में पहुँचता है, तो उसे कई प्रकार के समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
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शिशु को उसके आहार से मिलने वाले पोषक तत्वों में कैल्शियम का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। कैल्शियम की कमी से बच्चे में बहुत प्रकार के विकार उत्पन हो सकते हैं जिन्हें दावा की सहायता से ठीक किया जा सकता है। मगर ऐसी नौबत आये ही क्योँ?
कैल्शियम बच्चे की हड्डियों को मजबूत बनता है और उनका विकास करता है। अगर बच्चे को उसके आहार से उचित मात्र में कैल्शियम मिल सके तो बच्चे में बड़े होकर हड्डियों से संबंधी समस्या नहीं होती है।
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इन कारणों से बच्चों में होता है कैल्शियम की कमी
- जन्म के दौरान अगर बच्चे को कम कैल्शियम मिले तो
- जन्म के दौरान अगर माँ को मधुमेह (diabetes) है तो बच्चे को कैल्शियम की कमी होने की सम्भावना रहती है।
- अगर शिशु को दिए जाने वाले गाए के दूध में फॉस्फोरस की मात्र अधिक हो तो बच्चे को हाइपो-कैल्शियम होने की सम्भावना रहती है।
- बच्चे में विटामिन D की कमी से भी कैल्शियम का स्तर कम हो जाता है।
- बच्चे में कैल्शियम के कमी के लक्षण
- बच्चों के मस्पेशियों में खिचाव
- ब्लड प्रेशर के स्तर में कमी
- हार्ट रेट (heart rate) कम होना
- बच्चे के दिमाग में ऑक्सीजन का कम पहुंचना (low supply of oxygen)
- आंख झपकाना और होंठ हिलाना
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शिशु में कैल्शियम के कमी का इलाज
- अपने बच्चे को ऐसे आहार दें जिसमे कैल्शियम की मात्र भरपूर हो
- बच्चे को हर दिन कुछ देर के लिए बहार धुप में खेलने दें। अगर बच्चा बहुत छोटा है तो आप बच्चे को गोद में लेकर कुछ देर के लिए घर के अन्दर शीशे-की-खिड़की के पास बैठ जाएँ। इससे बच्चा ठण्ड के दिनों में ठंडी हवा से बचा रहेगा और गर्मियौं के दिनों में अत्याधिक गर्मी से।
- बच्चों के शारीर में सूरज के रौशनी से विटामिन D का स्तर बढ जाता है। कैल्शियम के अवशोषण में विटामिन D शारीर की मदद करता है।
- दूध पीते बच्चे के लिए कैल्शियम की कमी को पूरा करने का सबसे बेहतर तरीका है की बच्चे को स्तनपान कराया जाये। जब तक की बच्चे के शारीर में कैल्शियम का स्तर सामान्य न हो जाये तब तक बच्चे को गाए का दूध या फार्मूला दूध न दें। इसके बदले बच्चे को केवल स्तनपान (ब्रेस्टफीडिंग) कराएँ।
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विडियो: कैल्शियम की कमी को दूर करें इस तरह
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