Category: बच्चों की परवरिश

नवजात शिशु की देख रेख - Dos and Donts of Neonatal Care

By: Salan Khalkho | 1 min read

माँ बनना बहुत ही सौभाग्य की बात है। मगर माँ बनते ही सबसे बड़ी चिंता इस बात की होती है की अपने नन्हे से शिशु की देख भाल की तरह की जाये ताकि बच्चा रहे स्वस्थ और उसका हो अच्छा शारीरिक और मानसिक विकास।

नवजात शिशु की देख रेख - Dos and Donts of Neonatal Care guide

माँ बनना संसार की सबसे बड़ी ख़ुशी है और सबसे बड़े भाग्य की बात है। 

माँ बनने का सुख हर विवाहित स्त्री को नहीं मिल पाता है। 

मगर माँ बनने की हैं ढेरों जिम्मेदारियां:

यहां हम आप को बताएँगे की नवजात बच्चे की देखभाल से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें:

नवजात शिशु की देखभाल से सम्बंधित महत्वपूर्ण बातें:

  • पहले सात से दस दिनों तक अपने बच्चे को अपने शरीर से जितना हो सके सत्ता के रखें। इतने छोटे बच्चे के अंदर अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की छमता नहीं होती है। 
  • अपने बच्चे को जन्म के तुरंत बाद स्तनपान कराएं।
  • अगर आप का शिशु रोये तो आप उसे तुरंत शांत कराएं। अपने शिशु को रोता हुआ न छोड़ें।
  • अपने बच्चे को जब आप गोद में लें तो उसके सर को अपने हाथों से सहारा दें। छह महीने से छोटे बच्चों के गर्दन में इतनी ताकत नहीं होती है की वे अपने सर को स्थिर रख सके या उसके वजन को उठा सके। 
  • नवजात शिशु को अच्छी तरह कपड़ों में लपेट के रखें। इससे शिशु गरम रहेगा और उसके अंदर सुरक्षा की भावना भी उत्पन होगी। 
  • अपने शिशु के कपड़ों को अलग से धोएं। घर के बाकि कपड़ों के साथ मिला के न धोएं। 
  • शिशु को स्तनपान करने के बाद उसे गोद में ले कर डकार अवश्य दिलाएं। 

नवजात शिशु की देखभाल करते समय यह गलतियां न करें:

  1. अपने शिशु को बीमार व्यक्तियोँ के हाथों में न दें। उनके पास न लेके जाएँ। शिशु में रोग प्रतिरोधक छमता अविकसित होती है और उनमें बीमार पड़ने की (संक्रमण लगने की) छमता बहुत ज्यादा रहती है। 
  2. बच्चे के दूध की बोतल को microwave oven में गरम न करें। 
  3. ये उम्मीद न करें की आप का शिशु आप की तरह और आप के समय पे सोयेगा। नवजात शिशु के सोने का तरीका व्यस्क लोगों से बहुत भिन्न होता है और वे आप तौर पे पंद्रह से सोलह घंटे तक सोते हैं। 
  4. कभी भी अपने शिशु को अकेला न छोड़ें। हर वक्त उसके साथ रहें और अपनी उपस्थिति का अनुभव कराते रहें। 


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