बच्चों को सिखाएं गुरु का आदर करना

शिक्षक वर्तमान शिक्षा प्रणाली का आधार स्तम्भ माना जाता है। शिक्षक ही एक अबोध तथा बाल - सुलभ मन मस्तिष्क को उच्च शिक्षा व आचरण द्वारा श्रेष्ठ, प्रबुद्ध व आदर्श व्यक्तित्व प्रदान करते हैं। प्राचीन काल में शिक्षा के माध्यम आश्रम व गुरुकुल हुआ करते थे। वहां गुरु जन बच्चों के आदर्श चरित के निर्माण में सहायता करते थे।

करिए गुरु का सम्मान

गुरु संस्कृति के पोषक हैं, वे ही ज्ञान प्रदाता हैं,
साक्षरता के अग्रदूत, वे ही राष्ट्र निर्माता हैं।

आप अपने बच्चे को शिक्षित करने के साथ ही साथ उसे गुरु का आदर करना भी सिखाएं, क्योंकि गुरु ही बच्चे की दिशा निश्चित करते हैं। उसे सही गलत का फर्क करना सिखाते हैं। जहाँ पर बच्चा गलत रास्ते पर जाता है। शिक्षक ही उसे सही राह दिखता है। शिक्षक वर्तमान शिक्षा प्रणाली का आधार स्तम्भ माना जाता है। शिक्षक ही एक अबोध तथा बाल - सुलभ मन  मस्तिष्क को उच्च शिक्षा व आचरण द्वारा श्रेष्ठ,  प्रबुद्ध व आदर्श व्यक्तित्व प्रदान करते हैं। प्राचीन काल में शिक्षा के माध्यम आश्रम व गुरुकुल हुआ करते थे। वहां गुरु जन बच्चों के आदर्श चरित के निर्माण में सहायता करते थे।

शिक्षक का बच्चे के जीवन में अपार महत्त्व होता है। जो उसे सकारात्मक दिशा की ओर ले जाता है। अपने बच्चे को गुरु के महत्त्व के बारे में बताते हुए, कबीर दास जी द्वारा बताई गयी यह पंक्ति भी याद कराएं :

गुरु गोविन्द दोउ खड़े, काके लागु पाएँ,
बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दीयों बताएं।

भारतीय शिक्षा का एक मात्र उदेश्य मनुष्य को पूर्ण ज्ञान प्राप्त कराना था जिससे वह अंधकार से निकल कर ज्ञान के प्रकाश में विचरण करता था। भारतवर्ष समस्त विश्व में ज्ञान का वितरण करता था,  जिसके बल पर विश्व गुरु की संज्ञा से अभिहीत हुआ।

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अध्यापक वही महत्वपूर्ण होता है जो अपने गरिमापूर्ण चरित द्वारा अपने विद्यार्थी वर्ग को अनुकूल तथा सकारात्मक दिशा में प्रभावित करने में सफल हो सके।

 शिक्षक उस गुलाब की तरह हैं, जो सदैव काँटों में रह कर सुगंध बाटँता हैं। देश को सक्षम बनाने में माता - पिता और शिक्षक की भूमिका अग्रणी होती है।

 प्रत्येक बच्चे को अपने गुरु की इज़्ज़त करनी चाहिए। माता भी अपने बच्चे की प्रथम शिक्षिका होती हैं, अतः प्रत्येक ज्ञान देने वाले की रेस्पेक्ट करना हर बच्चे का कर्तव्य है।

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बच्चा भी अपने टीचर की हर बात मानता है, इसलिए यदि आपका बच्चा किसी बात को मानने में आना - कानी करता है तो उस बात को समझाने की ज़िम्मे दारी उसके शिक्षक को दे दें, वे आसानी से आपके बच्चे को समझा देंगे। खास कर छोटे बच्चे अपने टीचर के अंधभकक़्त होते हैं, वे उनकी हर बात का अनुकरण करते हैं।

शिक्षक दिवस के अवसर पर मैं यह कहना चाहूंगी कि शिक्षक ही युग निर्माता होते हैं, शिक्षक ही समाज की दिशा बदल देतें हैं। चाणक्य,  मदन मोहन मालवीय, तथा डॉक्टर राधा कृष्णन इसके प्रत्यक्ष उदहारण है।

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आज की पिज़्ज़ा और मैग्गी संस्कृति से बाहर निकल कर हमारे बच्चों की सोच हमें अच्छी बनानी है। वह वैचारिक स्तर पर परिपक्व हो। आपके बच्चे का हर कदम एक ऐसा कदम हो जो, उसे एक अच्छे पथ पर ले चले। हमे अपने बच्चे को एक सैनिक की तरह बनाना है, जो की हर परिस्थितयो का सामना कर सके और यह एक शिक्षक के माध्यम से ही संभव है।

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