
एक बात जान लीजिये!
अगर आप परेशान हैं अपने एक साल से कम उम्र के बच्चे के हिचकी को लेकर तो -
एक साल से कम उम्र के शिशु में हिचकी बहुत ही आम बात है।
यह चिंता की बात कतई नहीं है।
स्तनपान या बोतल से दूध पिलाने के बाद आप के बच्चे को हिचकी आ सकती है। यह होता है एसिड रिफ्लक्स (acid reflux) की वजह से।
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नवजात बच्चे का पेट तो छोटा सा होता है। कई बार अत्यधिक भूख लगने के कारण बच्चा बेकाबू हो जाता है और जल्दी जल्दी अपनी भूख मिटाने के चक्कर में इतना दूध पी लेते है की उसका छोटा सा पेट तन (फ़ैल) जाता है।
शिशु के आहार नाली के अंतिम छोर पे एक वाल्व (valve) होता है जो आहार को वापस मुँह में आने से रोकता है। यह वाल्व बच्चों में पूरी तरह से विकसित नहीं होता है।
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जिस वजह से बच्चे को एसिड रिफ्लक्स (acid reflux) का सामना करना पड़ता है। कभी कभी तो तने पेट पे इतना दबाव पड़ता है की दूध ही बहार आ जाता है। पेट के फ़ैल जाने से बच्चे के डायफ्राम पे दबाव पड़ता है।
डायफ्राम एक झिल्ली की तरह होता है जो बच्चे के पेट को उसके कलेजे और फेफड़ों से अलग करता है। डायफ्राम पे दबाव बढ़ते ही बच्चे को हिचकी आने लगती है।
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अगर आप के बच्चे को कोई और परेशानी नहीं तो हिचकी आना एक आम बात है। और चिंता की कोई बात नहीं है। जो बच्चे स्तनपान करते हैं और जो बच्चे बोतल से दूध पीते हैं, - दोनों ही प्रकार के बच्चों में हिचकी आम बात है।
हालाँकि यह माना जाता है की बोतल से दूध पिने पे बच्चा अक्सर ढेर सारा हवा भी दूध के साथ निगल जाता है। और इस वजह से भी बच्चे के पेट फ़ैल जाता है और उसे हिचकी आने लगती है।
दूध पिलाने के बाद बच्चे को थोड़ा सा डकार दिलाने से उसके हिचकी को रोका जा सकता है।
जब भी बच्चे को स्तनपान कराएं या बोतल से दूध पिलायें, अपने पास रूमाल अवश्य रखें। इससे अगर आप का बच्चा दूध पीते वक्त उलटी कर दे तो आप उसे पोछ सकेंगी।
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बच्चों के हिचकी को दूर करने के चार तरीके
- बच्चे को लिटा के नहीं वरन खड़े स्थिति मैं ही दूध पिलायें। जैसे की गॉड में बैठा के छाती से सटा के स्तनपान कराएं। एहि तरीका अपनाएं बोतल से दूध पिलाते वक्त भी।
- बच्चे को दूध पिलाने के बाद तक़रीबन आधे घंटे खड़े स्थिति में ही रखें। बच्चे के पीट पे मालिश करते रहें या धीरे-धीरे थपकी दें ताकि उसे डकार आ जाये। इससे बच्चे को आराम मिलेगा और हिचकी की सम्भावना भी कम होगी।
- बच्चे को एक बार में थोड़ा ही दूध पिलायें मगर कोशिश करें की हर थोड़ी थोड़ी देर पे दूध पिलाते रहें। इससे बच्चा अत्यधिक भूखा नहीं होगा।
- बोतल से दूध पिलाते वक्त हर 2-से-3 मिनट पे एक छोटा सा ब्रेक दें। ब्रेक के दौरान बच्चे को डकार दिलाने का कोशिश करें।
- बच्चे को कभी भी शहद न दें। यह एक साल से कम उम्र के बच्चे के लिए नुकसानदेह है।
अगर आप के बच्चे को इत्तनी हिचकी अति है की उसके लिए यह चिंता का कारण बन गया है तो आप डॉक्टरी सलाह लें।
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