
"अच्छे बच्चे" नाम की कोई चीज़ इस संसार में नहीं होती है।
आप भी कभी बच्चे थे और जरुरी नहीं की आप भी हर समय परफेक्ट हों।
ये बच्चों की आम आदत होती है की वे काम से भागते हैं, हर समय खेलना चाहते हैं, और अपने दुसरे भाई बहनों से लड़ते हैं।
ऐसी प्रिस्थितियौं में चाहे माँ-बाप में कितना भी धर्य क्योँ ना हो, एक बार तो वे अपने धर्य खो कर बच्चों पे चिल्ला ही देते हैं। लेकिन इसका बच्चों के दिमागी विकास पे दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।
इस लेख में:
- ~~~#15^^^चिल्लाने का बच्चों पे प्रभाव@@@
- ~~~#1^^^बच्चों पे लगातार चिल्लाने पे उन पे निम्न प्रभाव पड़ते हैं@@@
- ~~~#2^^^चिल्लाना बच्चे के बौद्धिक विकास को हानि पहुंचता है @@@
- ~~~#3^^^चिल्लाने से बच्चे के मस्तिष्क की संरचना ही बदल जाती है@@@
- ~~~#4^^^बच्चों की परवरिश का सफ़र - माता-पिता की चुनौती@@@
- ~~~#5^^^बड़ों के व्यवहार का बच्चों पे प्रभाव @@@
- ~~~#6^^^बिगड़े हालात में क्या करें @@@
- ~~~#7^^^शांत मन से स्थिति को संभालें@@@
- ~~~#8^^^गुस्से में ऐसा काम ना करें की बाद में पछतावा हो@@@
- ~~~#9^^^चिल्लाने का बच्चों पे प्रभाव@@@
- ~~~#10^^^अगर चिल्लाना पड़े तो क्या करें@@@
- ~~~#11^^^स्थिति शांत होने पे क्या करें@@@
- ~~~#12^^^विषम परिस्थितियोँ में आप का स्वाभाव कैसा होना चाहिए@@@
- ~~~#13^^^अपने बचपन को सदा समरण रखें@@@
- ~~~#14^^^कब बच्चों पे चिल्लाना उचित है@@@
anchorlink[15]anchorcloseचिल्लाने का बच्चों पे प्रभाव
माँ-बाप का चिल्लाना बच्चों को विस्मित (confuse) कर देता है। साथ ही उन्हें खतरे का एहसास दिलाता है। ऐसी स्थिति में वे मानसिक रूप से बचाव की स्थति में आ जाते हैं।
आप की बात को सुनने और समझने की बजाएं उनका दिमाग इस बात पे ज्यादा जोर देता है की क्या तर्क दिया जाये की बचाव हो सके।
इसका नतीजा ये होता है की जिस वजह से आप उनपे चिल्लाये, उसका कोई असर उनपे नहीं हुआ।
तो बच्चों पे चिल्लाने का क्या फायेदा!

viralblock
anchorlink[1]anchorcloseबच्चों पे लगातार चिल्लाने पे उनपे निम्न प्रभाव पड़ते हैं:
- बच्चे लगातार डर और तनाव की स्थिति में जीते हैं।
- उनके मन में बिना वजह चिंता घर लेती है।
- उन्हें रात को नींद बहुत देर से आती है (insomnia)।
- उनका बौधिक विकास बाधित (developmental delays) हो जाता है।
- उनमें व्यहार सम्बन्धी समस्या उत्पन होने लगती है।
- उनका व्यहार बहुत लड़ाकू (aggressive) हो जाता है।
- स्कूल में भी उनका प्रदर्शन गिर जाता है।
- उनके अंदर परिस्थितियोँ को सँभालने की छमता दुसरे बच्चों से कम होती है।

anchorlink[2]anchorcloseचिल्लाना बच्चे के बौद्धिक विकास को हानि पहुंचता है
पिट्सबर्ग विश्वविधालय (University of Pittsburgh) में हुए शोध में यह बात सामने आयी है की जो बच्चे ऐसे माहौल में रहते हैं जहाँ उनपर लगातार चिल्लाया जाता है, उनका बौद्धिक विकास (cerebral development) ठीक तरह से नहीं हो पता है।
ऐसे बच्चे दिखने में साधारण दीखते हैं, लेकिन उन्हें वो काम करने में बहुत कठिनाई आती है जहाँ ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पड़ती है - जैसे की पढाई करना या पहेली बुझाना।
ऐसे बच्चों का व्यक्तित्व भी बिगड़ जाता है। ये बच्चे उग्र मानसिकता के हो जाते हैं। दुसरे बच्चों के साथ आसानी से झगड़ने लगते हैं और बड़ों की बातों को अनसुना कर देते हैं।
anchorlink[3]anchorcloseचिल्लाने से बच्चे के मस्तिष्क की संरचना ही बदल जाती है
शोध में यह बात भी सामने आयी की अगर माँ-बाप जो बच्चों पे बहुत चिल्लाते हैं, अगर वे बच्चों से बहुत प्यार भी जतायें तो भी चिल्लाने से हुए नुकसान की भरपाई नहीं होती है।
इसी से मिलता जुलता शोध Harvard Medical School में भी हुआ। वहां के शोध के निष्कर्षों में एक और चौकाने वाली बात सम्मन आयी।

जिन बच्चों को लगातार चिल्लाने का सामना करना पड़ता है उनके मस्तिष्क की संरचना स्थाई रूप से बदल जाती है। इसका मतलब ऐसे बच्चों का व्यक्तित्व स्थाई रूप से बदल जाता है।
शोध में पाया गया की मस्तिष्क का वो हिस्सा जो भावनाओं और रिश्तों को नियंत्रित करता है उसकी कार्योँ (activities) में स्थायी रूप से कमी आ गयी है।
यानि ये बच्चे बड़े हो कर रिश्तों के अहमियत (गम्भीरता) को समझ नहीं पाते हैं।
अगली बार जब आप अपने बच्चे पे चिल्लाने जाएँ तो इस लेख को अवश्य याद किजियेगा।
आखिर आप के बच्चे के जिंदगी का सवाल जो है!
बच्चे पालना बहुत धैर्य का काम है - और बहुत जिम्मेदारी भरा भी।
कई बार तो बहुत निराशा का सामना भी करना पड़ता है। माँ-बाप का निराशा से धैर्य का सफर आसान नहीं होता है।
अच्छी परवरिश के लिए, बच्चों को प्यार, दृढ़ निश्चय और उत्साह से संभालना चाहिए।

anchorlink[4]anchorcloseबच्चों की परवरिश का सफ़र - माता-पिता की चुनौती
बच्चे बहुत नटखट होते हैं, और इस वजह से कई बार माँ-बाप अपना आपा खो देते हैं। छोटे बच्चे किसी की बात नहीं सुनते हैं। और इस वजह से माँ-बाप को काफी निराशा का सामना करना पड़ता है।
इसका नतीजा ये होता है की कई बार माँ-बाप अपने आप को बच्चों पे चिल्लाने से रोक नहीं पाते हैं।
लेकिन बच्चों पे चिल्लाने से उनपर इसका बुरा असर पड़ता है। बच्चे जो सब कुछ माँ-बाप से सीखते हैं, माँ-बाप के बुरे व्यवहार को भी सिख जाते हैं।
anchorlink[5]anchorcloseबड़ों के व्यवहार का बच्चों पे प्रभाव
अगर आप अपने बच्चों को अच्छी सिख देना चाहते हैं तो आप को भी वैसा ही व्यवहार उनके सामने प्रस्तुत करना पड़ेगा। हमारे व्यहार का बच्चों पे सीधा प्रभाव पड़ता है - और उनसे बच्चे सीखते हैं।

हम सभी बच्चों के सामने अच्छा व्यवहार प्रस्तुत करना चाहते हैं। समय-समय पे अपनी भावनाओं को प्रकट करना भी ठीक है। लेकिन यह भी उचित नहीं है की आप अपने बच्चों से ये उपेक्षा करें की वे हमेशा "आज्ञाकारी बच्चे" की तरह बर्ताव करें।
बच्चों का परेशान होना, चिड़चिड़ाना, बिलकुल स्वाभाविक स्वाभाव है। लेकिन ऐसे समय में उन्हें संभालना बहुत ही मुश्किल काम होता है।
anchorlink[6]anchorcloseबिगड़े हालात में क्या करें
इन मुश्किल घडी में आप बच्चों के साथ कैसा बर्ताव करते हैं, ये निर्धारित करता है की बच्चे का स्वाभाव बेहतर होगा या और बिगड़ेगा।

ऐसे मौके पे अगर आप भी बच्चों पे चिल्लाने लगे तो स्थिति सिर्फ बिगड़े गा। साथ ही बच्चे और माँ-बाप के बीच के रिश्ते पे भी प्रभाव पड़ेगा।
जब माहौल अनुकूल न हो तो उसे नियंत्रित करने की कोशिश न करें। इससे माहौल और बिगड़ सकता है।
बच्चों के बर्ताव के कारण अगर आप को कभी बहुत गुस्सा आये तो थोड़ी देर के लिए दुसरे कमरे में चले जायें। जब गुस्सा शांत हो जाये तब उनके सामने जाएँ।
anchorlink[7]anchorcloseशांत मन से स्थिति को संभालें
शांत मन से आप स्थिति को ज्यादा बेहतर तरीके सा संभल सकती हैं। आप स्थिति को कैसे संभालती हैं, बच्चे आप से ये भी सीखते हैं।

नाराजगी की स्थिति में आप तार्किक तरीके से सोच नहीं पाएंगी। और आप जो सन्देश अपने बच्चों को देना चाहती हैं वो उन्हें नहीं मिलेगा।
बच्चों के साथ जब माहौल बहुत ख़राब हो तो आप का भावुक होना स्वाभाविक है, लेकिन आप को समझना होगा की ऐसी स्थिति में आप के बच्चे भी भावुक होते हैं।
विशेषकर जब वे नाराज हों। जब आप नाराज होती हैं तो आप अपने बच्चों से कैसे स्वाभाव की उपेक्षा करती हैं? आप के बच्चे भी आप से ऐसे ही स्वाभाव की उपेक्षा करते हैं।
जब बच्चे गलतियां करते हैं तो चाहे आप को उन पे कितना भी गुस्सा आये, आप कुछ ऐसा उन्हें मत कह दीजियेगा की बाद में आप को पछतावा हो।

anchorlink[8]anchorcloseगुस्से में ऐसा काम ना करें की बाद में पछतावा हो
बच्चों पे चिल्लाना किसी भी समस्या का हल नहीं है। अगर आप अपने बच्चे पे चिल्लायेंगे तो वो आप की बात न सीखेंगे और ना ही समझने की कोशिश करेंगे।
और फिर,
हो सकता है की आप के बच्चे आप की बात फिर कभी जिंदगी भर ना सुने।
अगर आप सही मायने में अपने बच्चों को कुछ सिखाना चाहते हैं और उन्हें अच्छे संस्कार देना चाहते हैं तो आप को दुसरे रस्ते अपनाने पड़ेंगे। बच्चों पे चिल्लाना रास्ता नहीं है।
anchorlink[9]anchorcloseचिल्लाने का बच्चों पे बुरा प्रभाव
- बच्चों पे लगातार चिल्लाने से बच्चे अपने आप को महत्वपूर्ण नहीं समझते हैं और उनका आत्मविश्वास कमजोर होता है।

- बच्चों के मन में डर या दहशत पनपने लगता है। वे अपने आप को परिवार के दुसरे लोगों के साथ ताल-मेल बैठाने में सहज महसूस नहीं करते हैं।
- बच्चों को लगता है की केवल चिल्ला के ही वे अपना पक्ष रख सकते हैं। शांति से बैठ के किसी भी मसले को हल नहीं किया जा सकता है।
- जिन बच्चों के माँ-बाप लगातार अपने बच्चों पे चिल्लाते हैं, उनके बच्चों को पढाई में ध्यान केंद्रित करने में समस्या आती है। यूँ कहें तो हर वो काम जिस में ध्यान केंद्रित करने की जरूरत पड़ती हैं, उन्हें समसस्या आती है।
- इन बच्चों को मिल कर खेलना या team work में कोई काम करने में भी दिक्कत आती है।

anchorlink[10]anchorcloseअगर चिल्लाना पड़े तो क्या करें
कई बार न चाहते हुए भी माँ-बाप को बच्चों पे चिल्लाना पड़ जाता है। अगर लाख कोशिशों के बावजूद भी आप अपना सयम न रख पाएं और अपने बच्चों पे चिल्लाएं तो - निम्न लिखित तरीके से स्थिति को ठीक करने की कोशिश करें ताकि बच्चे पे आप के चिल्लाने का बुरा प्रभाव न पड़े।
- बच्चे को गले लगा के प्यार से kiss करें।
- अगर बच्चे बड़े हों तो उनके साथ टहलने जाएँ ताकि गीले शिकवे दूर हो सकें। बच्चे चाहते हैं की उन्हें भी बड़ों की तरह मान - सम्मान दिया जाये।
- बच्चों पे चिल्लाने के तुरंत बाद उनसे कहें की उन्हें शांत होने के लिए कुछ समय चाहिए और दुसरे कमरे में चले जाएँ।
- जब आप का गुस्सा शांत हो जाये तो चिल्लाने के लिए बच्चों से माफ़ी मांगे। उनसे बताएं की आप को उनपे चिल्लाना नहीं चाहिए था।
- अपने बातों से बच्चों को जतायें की आप उनसे प्यार करती हैं।
- अपने बच्चों को बताएं की वह कौन सी वजह थी जिस की वजह से उन्हें उनपे चिल्लाना पड़ा था।
anchorlink[11]anchorcloseस्थिति शांत होने पे क्या करें
एक बार जब स्थिति शांत हो जाये तो आप को कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने पड़ेंगे ताकि आप के बच्चे समझ सकें की उन्हें क्या करना चाहिए ताकि उन परिस्थितियोँ से बचा जा सके जिन की वजह से आप को गुस्सा आया था।

- बच्चों को बताएं की आप उनसे प्यार करते हैं और आप को उनसे नाराजगी नहीं है। लकिन जिस प्रकार के हालत पैदा हुए थे, वे निराशाजनक थे और उन हालातों की वजह से आप को गुस्सा आया।
- बच्चों को समझाते वक्त इस बात पे जोर न दें की उन्हें क्या नहीं करना चाहिए। बल्कि इस बात पे जोर दें की ये क्या कर सकते हैं की फिर से ऐसे हालत पैदा न हों।
- बच्चों के ध्यान को दूसरी तरफ बताएं क्योँकि आप के चिल्लाने के बाद कुछ डियर के लिए उसके दिमाग की स्थिति "कोरे कागज" की तरह हो जाती है।
anchorlink[12]anchorcloseविषम परिस्थितियोँ में आप का स्वाभाव कैसा होना चाहिए
इस बात को एक उदहारण की सहायता से समझने की कोशिश करते हैं। अगर आप अपने बच्चे पे इसलिए चिल्लाई थीं कि उसने दीवाल पे कुछ बनाया था, तो अपने बच्चे को प्यार से बताएं की उसे किताब में बनाना चाहिए था। बच्चे को किताब और पेंसिल दें बनाने के लिए।

बच्चे के कार्य के लिए उसे मुस्कुराकर प्रोत्साहित करें की उसने आप की बात को मन है। बच्चों को सँभालते वक्त प्यार से बड़े-बड़े काम बन जाते हैं।

anchorlink[13]anchorcloseअपने बचपन को सदा समरण रखें
जीवन एक लम्बी यात्रा है और हर इंसान कभी-ना-कभी गलती करता है। अपने बचपन को याद कीजिये की जब आप छोटी थीं तो आप ने क्या-क्या गलतियां की।

anchorlink[14]anchorcloseकब बच्चों पे चिल्लाना उचित है
अगर आप के बच्चे गंभीर परिस्थितियोँ में हों या उनके कार्य से दुर्घटना होने की सम्भावना है और आप के चिल्लाने से आप के बच्चे दुर्घटना से बच सकते हैं तो जरूर चिल्लाएं।
बस इस बात का ध्यान रखें की आप का चलना आप की आदत न बन जाये।