
यह सवाल!
एक ऐसा सवाल है जो हर स्त्री के जहन में एक बार जरूर आता है जो पहली बार माँ बनी हो।
"शिशु को हिचकी क्यों आता है?"
हकीकत तो यह है की बच्चे को हिचकी तब से ही आने लगती है जब गर्भवती महिला अपने प्रसव के second trimester में पहुँचती है।
जब आप गर्भवती थी तो क्या आप ने कभी अपने बच्चे को अपनी कोख में धड़कन करते या एक लय में स्पंदन करते महसूस किया था?
क्या आप जानती है - हो सकता है की उस वक्त आप के बच्चे को हिचकियाँ आ रही थी।
कुछ गर्भवती महिलाएं ऐसा होने पे डर सी जाती हैं। उन्हें समझ ही नहीं आता की यह क्या हो रहा है।
बच्चे गर्भ में रहते वक्त तो हिचकी करते ही हैं, मगर जब वे पैदा हो जाते हैं तो भी हर वक्त उन्हें हिचकी आती है - जब तक की वे एक साल के ना हो जाये।
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मगर सवाल यह है की शिशु को हिचकी क्यों आता है?
बच्चे को हिचकी उसके डायफ्राम के संकुचन के कारण आती है। नवजात बच्चे में हिचकी की मुख्या वजह बच्चे का ज्यादा आहार ग्रहण कर लेना है। जो बच्चे बोतल से दूध पीते हैं वे दूध पीते वक्त दूध के साथ ढेर सारा वायु भी घोट लेते हैं। इसके कारण बच्चे का पेट फ़ैल जाता है बच्चे के डायफ्राम पे दबाव पड़ता है और डायाफ्राम में ऐंठन के कारण हिचकी शुरू हो जाती है। या कभी थोडा सा दूध बहार आ सकता है।
नवजात शिशु का पेट बहुत छोटा सा होता है। इस वजह से तुरंत भर जाता है। कुछ लोगों में यह धारणा आम है की अगर बच्चे को हिचकी आ रही है तो इसक मतलब है की उसने अच्छे से पेट भर दूध पिया है।
अगर आप के बच्चे को हिचकी आये तो आप को क्या करना चाहिए?
सबसे पहले तो आप शांत हो जाइये। इसमें कोई घबराने की बात नहीं है। हिचकी से आप के बच्चे को कोई हानी नहीं होगी। हाँ अलबत्ते हिचकी के कारण कभी कभार बच्चे को थोड़ी सी उलटी हो सकती है।
आप चाहें तो अपने बच्चे को डकार दिला सकती हैं। बच्चे को डकार दिलाने के लिए उसके पीट पे हलके हाथों से मालिश कर सकती हैं। मगर उम्मीद है की आप को फिर भी इंतज़ार ही करना पड़ेगा और समय के साथ आप के बच्चे की हिचकी स्वतः ही समाप्त हो जायेगा।
नवजात बच्चे पे घरेलु नुस्खे न आजमाएं। इससे बच्चे को हानी हो सकता है। उदहारण के तौर पे कुछ लोग हिचकी आने पे बच्चे को शहद देने का सुझाव दे सकते हैं। यह बच्चे के लिए बेहद घातक हो सकता है।