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टाइफाइड एक प्रकार के जीवाणु के संक्रमण से होता है। टाइफाइड का संक्रमण होने पे शिशु बहुत अधिक बीमार हो जाते हैं और यह बीमारी उनके लिए जानलेवा भी हो सकता है। टाइफाइड का संक्रमण फैलता है दूषित आहार और पानी के सेवन से। टाइफाइड भारत देश में आम बात है और इसीलिए शिशु को टाइफाइड की संक्रमण से बचने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए।
फाइड कन्जुगेटेड वैक्सीन (TCV 1 & TCV2) - डोज़ (dose) - Schedule of immunization
- पहली खुराक (TCV 1) - 10-12 महीने की उम्र में
- दूसरी खुराक (TCV 2) - 15-18 महीने की उम्र में
इसीलिए आवश्यक है की हर बच्चे को टीकाकरण चार्ट - 2018 के अनुसार समय पे टीका लगवाया जाये और बच्चे को तथा देशो को टाइफाइड कन्जुगेटेड की महामारी से बचाया जा सके।
यह टीका क्योँ दिया जाता है?
टाइफाइड कन्जुगेटेड वैक्सीन (TCV 1 & TCV2) एक सुरक्षित और असरदार तरीका है शिशु को टाइफाइड की बीमारी से बचने का। टाइफाइड कन्जुगेटेड वैक्सीन देने पे शिशु के शारीर में टाइफाइड के जीवाणु के प्रति antibody निर्मित हो जाता है जो शिशु के शारीर को टाइफाइड के जीवाणु से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक छमता प्रदान करता है।
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सावधानी (precautions)
- अगर आप के शिशु को बुखार है तो जब तक की आप का बच्चा पूर्ण रूप से ठीक न हो जाये उसे टाइफाइड कन्जुगेटेड वैक्सीन न लगवाएं।
- शिशु को टाइफाइड कन्जुगेटेड वैक्सीन (TCV 1 & TCV2) देने पे अगर शिशु में कुछ दुश प्रभाव दिखे तो तुरन अपने डोक्टर से संपर्क करें।
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दुष्प्रभाव (side effects)
टाइफाइड कन्जुगेटेड वैक्सीन (TCV 1 & TCV2) की वजह से जानलेवा दुष्प्रभाव (side effects) होना बहुत ही दुर्लभ बात है। लेकिन फिर भी फिर भी कुछ मामूली दुष्प्रभाव (side effects) हो सकते हैं जैसे की
- बुखार
- सर दर्द
- मस्पेशियौं में दर्द (muscles pain)
- शारीर में जिस जगह सुई लगायी गयी है उस जगह पे सुजन, त्वचा का लाल पड़ना और दर्द होना
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यह टीका किन बच्चों को नहीं लगाया जाना चाहिए
- शिशु को अगर प्रथम टीके में घम्भीर
दुष्प्रभाव (side effects) हुआ हो तो दूसरी खुराक न दिलवाएं और शिशु डोक्टर की राय लें।