
जब आपका बच्चा 1-3 साल का होता है तो उसका आहार बहुत महत्वपूर्ण है। इस उम्र में बच्चे के शरीर को पोषण की आवश्यकता बहुत ज्यादा होती है। अलग अलग तरह के पोषण (nutrients) अगर बच्चे को इस उम्र में नहीं मिले तो, यह बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकता है। इस उम्र में बच्चे को आप दाल, पतला सब्जी (vegetable soup), चना आदि दे सकते हैं।
1-3 साल के बच्चे का आहार इस तरह होना चाहिए की उसके शरीर की आवश्यकता अनुसार उसे carbohydrates, vitamins, minerals और fats की उचित मात्रा मिल सके - संतुलित आहार चार्ट।
अक्सर माताओं के लिए यह काफी चुनौतीपूर्ण रहता है की बच्चो को क्या दें की उनले बढ़ते शरीर को पोषक तत्वों की उचित खुराक मिल सके। कोई भी नया भोजन जब आप पहली बार बच्चे को देते हैं तो वो नखड़े कर सकता है। लेकिन अगर आप लगे रहें तो समय के साथ आप के बच्चे को सभी तरह के भोजन पसंद आने लगेंगे।
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3 साल तक के बच्चे का baby food chart
Monday
- सुबह का नाश्ता - Sandwich और एक गिलास दूध
- दोपहर का खाना - मुंग की दाल की खिचड़ी
- शाम का नाश्ता - एक केला
- रात का खाना - एक कटोरा दाल और रोटी
Tuesday
- सुबह का नाश्ता - दलीय और एक गिलास दूध
- दोपहर का खाना - मटर-गाजर की सब्जी और रोटी
- शाम का नाश्ता - एक आम
- रात का खाना - पनीर की सब्जी और रोटी
Wednesday
- सुबह का नाश्ता - सूजी का हलुवा और दूध
- दोपहर का खाना - पांच दालों से बनी खिचड़ी
- शाम का नाश्ता - एक संतरा
- रात का खाना - मसूर की दाल और रोटी
Thursday
- सुबह का नाश्ता - आलू पराठा और दही
- दोपहर का खाना - veg-पुलाव और रायता
- शाम का नाश्ता - एक सेब
- रात का खाना - पनीर की रोटी और सब्जी
Friday
- सुबह का नाश्ता - सूजी का उपमा और ग्लास दूध
- दोपहर का खाना - राजमा और चावल
- शाम का नाश्ता - एक अमरुद
- रात का खाना - भिंडी की सब्जी और रोटी
Saturday
- सुबह का नाश्ता - मुंग दाल का चीला और दही
- दोपहर का खाना - पुलाव और पनीर की सब्जी
- शाम का नाश्ता - नाशपाती
- रात का खाना - आलू मटर की सब्जी और रोटी
Sunday
- सुबह का नाश्ता - पोहा और एक गिलास दूध
- दोपहर का खाना - पौष्टिक दाल और सब्जी की खिचड़ी
- शाम का नाश्ता - अंगूर
- रात का खाना - रोटी और मुंग की दाल
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बच्चों के आहार में पोषक तत्त्व बढ़ाने के तरीके
चूँकि 1-3 साल का बच्चा बहुत तीव्र गति से विकासशील होता है उसके शरीर को ज्यादा पोषकतत्व की आवश्यकता होती है। जरुरी नहीं की जो आहार आप बच्चे को दे रहें हैं उसमे इतना पोषक तत्त्व (nutrients) हो जो बच्चे की nutritional requirements को पूरा कर सके। ऐसे मैं आप बच्चों के आहार में पोषक तत्त्व (nutrients) बढ़ाने के लिए यह तीन युक्तियाँ कर सकती हैं:
- काजू और बादाम को तवे पे हल्का भून के उसे grinder में पीस लें। पसे हुए काजू और बादाम के powder को एक air-tight container में बंद कर के रख दें। जब कभी आप हलुवा या बच्चों के लिए pudding बना रहें हों तो उसमे एक चम्मच काजू और बादाम का पीसा पाउडर पकाते वक्त मिला दें। काजू और बादाम का पाउडर इतना बनायें की वो महीने भर में समाप्त हो जाये।
- बच्चो का आहार त्यार करते वक्त आप उसमे dairy products भी मिला सकते हैं जैसे की cheese, दही, पनीर। इससे बच्चे में calcium की आवश्यकता पूरी होगी।
- Pudding या हलुवा बनाते वक्त आप बच्चे के भोजन में शुद्ध देशी घी मिला सकते हैं।
- जब बच्चा सुबह सो कर उठता है तो आप उसे एक कप दूध के साथ दो बादाम दे सकते हैं। बादाम को त्यार करने के लिए उसे रात भर पानी में भिगो दें। बच्चे को सुबह देने से पहले उसका ऊपर का भूरा छिलका निकल दें। इसे हमेशा ताजा त्यार किया हुआ ही बच्चे को दें।
- डबल रोटी देते वक्त आप उसमे अच्छे से माखन लगा सकते हैं। डबल रोटी के साथ आप बच्चे को ऑमलेट (omelet) भी दे सकते हैं।
बच्चों को snacks इस तरह दें
सुबह के नाश्ते और दोपहर के खाने के बीच का जो समय होता है उसे आप snacks time कह सकते हैं। इस वक्त कभी-कभी बच्चे कुछ खाने के लिए मांग करते हैं। अगर बच्चा मांगे कुछ खाने के लिए तो उसे दें। मगर इस बात का ध्यान रखें की जो भी बच्चे को खाने को दें उससे बच्चे को पोषक तत्त्व (nutrients) मिले। Snacks में आप बच्चे को एक कटोरा कटे-हुए-फल, फलों का जूस, विभिन प्रकार के सब्जियों का soup दे सकतेहैं। हर दिन बच्चे को कुछ नया दें ताकि आपका बच्चा एक ही snacks रोज-रोज खा कर बोर न हो जाये।
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सुबह का नाश्ता और दुपहर का खाना
आप के बच्चे का सुबह का नाश्ता बहुत ही पौष्टिक होना चाहिए और उतना ही पौष्टिक दोपहर का भोजन भी होना चाहिए। भोजन में आप अपने बच्चे को दाल, पनीर, स्वादिष्ट सब्जियां, भिंडी, पत्ता गोभी, मटर और गाजर, रोटी के साथ परोस सकते हैं। भोजन में आप अपने बच्चे को थोड़ा सा सलाद भी अवशय दें।
3 साल के बच्चे का शाम का नाश्ता
शाम के वक्त आप अपने बच्चे को स्वादिष्ट नाश्ता दे सकते हैं। 3 साल के बच्चे को fast food या ready-made snacks न दें। अगर आप अपने बच्चे को नाश्ते मैं घर का बना burgers, noodles, pizzas और sandwiches दे रहे हैं तो ध्यान रखें की उसे साथ में ढेर सारी मौसमी सब्जियां भी दें। जैसे की आप उसे snacks के साथ बोड़ा, beans, गाजर, टमाटर, शिमला मिर्च (capsicum), और मटर दे सकते हैं। नाश्ते के साथ आप अपने बच्चे को smoothies भी दे सकते हैं।
3 साल के बच्चे का रात का खाना (Dinner)
रात का खाना आप के बच्चे का दिन का आखरी भोजन है। इसीलिए इसमें ढेर सरे पौष्टिक तत्त्व (nutrients) होने चाहिए - मगर फिर भी, आप के छोटे से बच्चे के पेट के लिए हलके होने चाहिए। रात के खाने में अगर आप अपने बच्चे को गरिष्ट भोजन देंगे तो बच्चे को उसे पचाने में तकलीफ होगी, रात भर बेचैनी लगी रहेगी, ठीक से सो भी नहीं पायेगा, उसे पेट दर्द, अपच, और उलटी भी हो सकती है। इसीलिए रात्रि भोजन में आप अपने बच्चे को पौष्टिक आहार तो दें मगर ऐसा जो की हल्का-फुल्का भोजन ही हो। आप अपने बच्चे को dinner में सब्जी और पराठा दे सकते हैं या फिर आप उसे मुंग का दाल और साथ में एक कटोरा दही दे सकते हैं। खाने के बाद आप अपने बच्चे को गाजर का हलवा या फिर खीर भी दे सकते हैं।
3 साल के बच्चे का डाइट चार्ट बनाते वक्त इन बातों का ध्यान रखें - (Diet Chart of a 3 Year Old Indian baby)
- छोटे बच्चों का पेट भी छोटा सा होता है। थोड़े से आहार में ही बच्चे का पेट भर जाता है। इसीलिए बच्चे को दिन भर थोड़ा-थोड़ा आहार देते रहें। 3 साल के बच्चे का diet chart बनाते वक्त ऐसे आहारों का चयन करें की बच्चे को सभी प्रकार के पौष्टिक तत्त्व (variety of nutrition) मिल सकें। इसके लिए आहार में सभी nutrition groups में से कुछ-न-कुछ सम्मलित करें।
- रसोई में बच्चे का भोजन त्यार करते वक्त अपने बच्चे की सहायता लें। उसे कोई बहुत छोटा सा काम दें जो वो आसानी से कर सके, जैसे की फलों को टोकरी में रखना या टेबल पे सजाना। इससे आपका 3 साल का बच्चा आपके द्वारा त्यार किये गए भोजन में रूचि लेगा।
- हर दिन दैनिक आहार में कुछ नया सम्लित करें ताकि आपके बच्चे को सबकुछ खाने की आदत पड़े।
- बच्चे के आहार में विभिन प्रकार के अनाज को सम्लित करें। अपने बच्चे को कई प्रकार के अनाज से बने रोटी को खाने को दें।
- एक अच्छा Diet chart for 3 years kids in India बनाने के लिए आपको यह निर्धारित करना पड़ेगा की आप के बच्चे के लिए कितने आहार की मात्रा उसकी भूख मिटने के लिए पर्याप्त है। बच्चा जैसे-जैसे बड़ा हो उसे प्रोत्साहित करें की वो अपना प्लेट खुद ही त्यार करे और उतना हो भोजन अपने प्लेट में निकले जितना की वो खा के ख़त्म कर सके।