Category: शिशु रोग

ठंड में बढ़ जाता है हाइपोथर्मिया का खतरा

By: Vandana Srivastava | 6 min read

हाइपोथर्मिया होने पर बच्चे के शरीर का तापमान, अत्यधिक कम हो जाता है। हाईपोथर्मिया से पीड़ित वे बच्चे होते हैं, जो अत्यधिक कमज़ोर होते हैं। बच्चा यदि छोटा हैं तो उससे अपने गोद में लेकर ,कम्बल आदि में लपेटकर उससे गर्मी देने की कोशिश करें।

What is hypothermia

अगर कभी आप का बच्चा अचानक से अत्यधिक थका हुआ लगे या उसके अंदर कुछ असामान्य परिवर्तन दिखे तो सबसे पहले उसके शरीर का तापमान चेक करें। यदि उसके शरीर का तापमान कम लगे तो ये समझ लेना चाहिए की आपके बच्चे को अल्प ताप या हाइपोथर्मिया की बीमारी हैं जो ठंड के मौसम में अधिक प्रभावी होती हैं।

इस लेख में आप सीखेंगे - You will read in this article

  1. क्या है हाइपोथर्मिया
  2. हाइपोथर्मिया में क्या होता है
  3. हाइपोथर्मिया के लक्षण
  4. बच्चों में हाइपोथर्मिया होने का कारण
  5. हाइपोथर्मिया का प्राथमिक उपचार
  6. बच्चों को हाइपोथर्मिया से बचाने के उपाय

क्या है हाइपोथर्मिया - What is hypothermia?

हाइपोथर्मिया होने पर बच्चे के शरीर का तापमान, अत्यधिक कम हो जाता है। हाईपोथर्मिया से पीड़ित वे बच्चे होते हैं, जो अत्यधिक कमज़ोर होते हैं। गांव में रहने वाले अधिकतर बच्चे हाइपोथर्मिया के शिकार हो जाते हैं और इसी कारण से इन बच्चों की मृत्यु दर बढ़ जाती है। 

जब तक बच्चा माँ के पेट में रहता है, तब तक उसका तापमान कुछ और रहता है, लेकिन जन्म लेने के बाद ही वह बाहर के तापमान में आ जाता है, जिसे वह एकदम नहीं सह पाता है। इस समय बच्चों को ठंड लग जाती है और वह निमोनिया का शिकार हो जाता है।   

हाइपोथर्मिया में क्या होता है - What happens in hypothermia?

जब बच्चें के शरीर का तापमान अत्यंत कम हो जाता है तो उसका हार्ट, नर्वस सिस्टम और कई अंग सही से काम नहीं करते। और यदि समय से इसका इलाज न हो तो कुछ समय के बाद वह जानलेवा साबित हो सकते हैं।

हाइपोथर्मिया को अल्पताप भी कहा जाता है। यह बच्चे के शरीर की एक ऐसी स्थिती होती है, जिसमें शरीर का तापमान सामान्य से कम हो जाता है।जब तापमान बहुत कम हो जाए या शरीर की गर्मी पैदा करने की क्षमता कम होने लगे तो हाइपोथर्मिया होता है।

हाइपोथर्मिया के लक्षण   

  • इस स्थिती में बच्चे के हाथ सही से काम नहीं करते। 
  • इस दौरान सबसे अधिक तकलीफ बच्चे के पेट में होती है और वह थकान महसूस करता है।
  • इस बीमारी में धीरे बोलना,अत्यधिक नींद आना, कंपकंपी लगना,हाथों और पैरों  में जकड़न, शरीर पर अपना वश न पता लगना, रिस्पांस देने में देर लगना या नब्ज का कमजोर लगना  जैसे लक्षणों के रूप में दिखाई पड़ती है।
  • जब बच्चे के शरीर का तापमान गिरता है, तो उसका हार्ट, नर्वस सिस्टम  और दूसरे अंग सामान्य रूप से काम नहीं कर पाते हैं। अगर इस बीमारी को अनदेखा कर दिया जाए, तो यह हार्ट और सांस प्रणाली के फेल होने का कारण बन सकता है।

हाइपोथर्मिया के लक्षण

 बच्चों में हाइपोथर्मिया होने का कारण 

बच्चों में हाइपोथर्मिया होने का सबसे बड़ा कारण ठंड है। बच्चा जितनी देर ठंड के संपर्क में रहता है, उतना ही उसके शरीर का तापमान कम होता जाता है। इसी वजह से ठंड का मौसम बच्चे के लिए नुकसान दायक होता है। इसके अतिरिक्त बच्चे का वज़न, उसके शरीर में वसा का प्रभाव, अन्य खनिज तत्वों की कमी भी  हाइपोथर्मिया होने का एक कारण है।

हाइपोथर्मिया का प्राथमिक उपचार

  • प्राथमिक उपचार के तौर पर बीमार बच्चे को सबसे पहले बंद, गर्म कमरे में लेटा दें। 
  • उसके कपड़े यदि गीले हो तो बदल दे। 
  • गर्म कपड़ों की परतें उन्हें पहना दें।
  • जिस भी तरह से बच्चे को गर्मी दिया जा सके ,उसे देने की कोशिश करे।
  • बच्चा यदि छोटा हैं तो उससे अपने गोद में लेकर ,कम्बल आदि में लपेटकर उससे गर्मी देने की कोशिश करें।

बच्चों को हाइपोथर्मिया से बचाने के उपाय

 

बच्चों को हाइपोथर्मिया से बचाने के उपाय

  • जाड़े के मौसम में बाहर जाते समय अपने बच्चे को टोपी दास्तानें जरूर पहनाये। 
  • ज्यादा ठंड पड़ने और हवा वाले दिनों में बच्चे को घर के अंदर ही रखे और उससे गर्मी देने की कोशिश करें।
  • जरूरत पड़ने पर बाहर जाना पड़े, तो ज़्यादा से ज़्यादा गर्म कपड़े पहनाये, ताकि शरीर मे गर्मी बनी रहे।
  • जाड़े में अपने बच्चे को कई कपड़े पहनाये। इससे गर्मी परतों में बंद रहेगी। बच्चे को कसे कपड़े न पहनाये,  इससे ब्लड सरर्कुलेशन में रुकावट हो सकती है।
  • सर्दी जुकाम की दवाएं भी समस्या पैदा कर सकती हैं।
  • अपने बच्चे का वजन सामान्य बनाए रखने के लिए पोषण युक्त भोजन दें। उचित भोजन के अभाव में चर्बी कम हो जायेंगी और शरीर का तापमान और भी कम हो जायेगा।

बीमारी काबू में ना आने पर डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

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