रागी दिखने में सरसों की तरह दीखता है और रागी का खिचड़ी बहुत ही पौष्टिक शिशु आहार है। इसमें बाकि अनाजों की तुलना मैं तीस गुना ज्यादा कैल्शियम होता है और साथ ही इसमें बहुत प्रकार के खनिज भी होते हैं।
इसका मतलब बढ़ते बच्चों की हड्डियोँ को मजबूत करने के लिए रागी बहुत अच्छा शिशु आहार है। इसका नियमित आहार बच्चे को कुपोषण से बचा सकता है।
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रागी का खिचड़ी - सम्बंधित जानकारी
- बच्चे का उम्र: 7 से 8 माह के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: आयरन, कैल्शियम, एमिनो एसिड एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
रागी को Nachni और finger millet भी कहा जाता है। इसमें पोषक तत्वों का भंडार है। कैल्शियम, पोटैशियम और आयरन तो इसमें प्रचुर मात्रा में होता है।
चूँकि इसमें gluten नहीं होता है इसीलिए नन्हे शिशु को एलेर्जी का भी कोई खतरा नहीं। [Note - गेहूं में gluten होता है इसीलिए गेहूं से बने आहार को बच्चे को शुरू में थोड़ा ही देना चाहिए] रागी में वासा (fat) कम होता है और बच्चों में ये आसानी से पच जाता है।
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रागी में पोषक तत्वों की जानकारी (100g रागी में):
- सम्पूर्ण कैलोरी - 378
- प्रोटीन - 11g
- वासा (fat) - 0.4g
- कार्बोहायड्रेट - 72.9g
सामग्री (ingredient)
- 1/4 कप पीला मूंग दाल
- 1/4 कप रागी Seeds
- 2 चम्मच शुद्ध देशी घी
- 1/4 हींग
रागी का खिचड़ी - शिशु आहार - बनाने की विधि
- मूंग दाल और रागी के दानो को कम से कम चार घंटे लिए पानी में भिगो दें।
- अब मूंग दाल और रागी और हींग को कुकर में माध्यम आंच पे चढ़ा दें। तीन से चार सिटी तक इसे पकाएं। के बार जब ये पक जाये तो कुकर के आंच को बंद कर दें और कुकर को ठंडा होने के लिए छोड़ दें।
- ठंडा होने पे खिचड़ी को एक कटोरे में निकल दें और इसमें देशी घी मिला दें।
- अपने शिशु को चम्मच से खिलाएं।
- अगर खिचड़ी बहुत गाहड़ा बने तो आप इसकी consistency को पानी मिला के adjust कर सकते हैं।
भारत रागी का सबसे बड़ा उत्पादक है। मगर फिर भी भारत के बहुत से ऐसे राज्य हैं जहाँ रागी के बारे में लोग नहीं जानते हैं। कुश सालों के लिए जब में बैंगलोर में था तब में इसके बारे में सबसे पहले जाना। बैंगलोर में लोग बड़े पैमाने पे रागी का इस्तेमाल आहार के रूप में करते हैं।
भारत के जिन राज्योँ में लोग रागी का इस्तेमाल करते हैं वहां के लोगों को रागी के पौष्टिक गुणों के बारे में पता है। इसीलिए ऐसे राज्योँ में बच्चों को रागी से बने आहार देने महत्वपूर्ण समझते हैं। रागी बच्चों के लिए वाकई बहुत पौष्टिक है।
हालाँकि रागी को कैसे त्यार करते हैं इसके बारे में अगर आपने पता किया तो आप रागी के आहार बनाने के ख्याल त्याग देंगे। क्योँकि रागी को traditional तरीके से बना बहुत जटिल काम है। जैसे की रागी को धोना, फिर अंकुरित करने के लिए छोड़ना और सबसे अंत में रागी को सूखा के इसे मशीने के द्वारा पीसना।
मगर आप को ये सब करने की आवश्यकता है।
बाजार में आसानी से रागी का पहले से processed किया हुवा आटा मिलता है। रागी से आहार बनाना अब आसान हो गया है। रागी को अंकुरित करने से इसके पौष्टिक गुण बढ़ जाते हैं और ये आसानी से पचने योग हो जाता है।
रागी porridge for Babies को त्यार करने का तरीका
रागी का खिचड़ी रागी के आटे जिसे रागी पाउडर भी कहते हैं, उससे बनता है। अब बाजार में रागी का आटा या रागी का पाउडर आसानी से मिलने लगा है। इसलिए रागी से बनने वाले आहार बनाना आसान हो गया है। मगर अगर आप घर पे ही रागी के आटे को त्यार करना चाहते हैं तो उसकी विधि हम आपको यहां बता रहें हैं।
- रागी को अच्छे से धो लें और धुप में फैला के सूखा लें।
- इस तरह सूखे रागी को आप शीशे के airtight container में बाद के इस्तेमाल के लिए भी रख सकते हैं।
- जितने रागी की आवश्यकता हो उतनी मात्रा आप नाप के पानी में भिगो के एक रात के लिए रख दें। एक बड़ा चम्मच रागी ६ महीने के बच्चे के लिए पर्याप्त है।
- अगले दिन पानी छान के फेंक दें और रागी को धुप में सूखा लें।
- रागी का दाना जितना अच्छा सूखेगा वो उतना अच्छे से पीस जायेगा।
- मिक्सी या grinder में रागी के सूखे दाने को थोड़े से पानी के साथ पीस लें।
- पीसने के बाद अगर रागी बहुत गाहड़ा हो जाये तो उसमे और पानी मिला लें।
- अब इसे उबाल लें।
- जब यह अच्छी तरह पाक जाये तब इसे अपने बच्चे को चम्मच से खिलाएं।
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