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क्या आप ने अल्बिनो शब्द के बारे में सुना है?
यह एक प्रकर की बीमारी है जिसमे त्वचा पे pigment की कमी हो जाती है। यह एक ऐसी बीमारी है जो इंसान, जानवर और पेड़ - पौधे को भी हो जाता है।
अल्बिनो (albinism) की वजह से त्वचा का रंग हल्का हो जाता है।
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अल्बिनो (albinism) किस वजह से होता है?
अल्बिनो (albinism) को समझने से पहले आपको melanin के बारे में समझना पड़ेगा। मेलेनिन एक प्रकार का पदार्थ है जो हमारे शरीर में पाया जाता है।
मेलेनिन (melanin) की कितनी मात्रा हमारे त्वचा में मौजूद है, इसी आधार पे हमरी त्वचा के रंग का निर्धारण होता है।
जब शिशु का शरीर उचित मात्रा में मेलेनिन (melanin) का निर्माण नहीं कर पता है तब बच्चे के बाल और आँखों का रंग हल्का हो जाता है।
कभी-कभी इस बीमारी में बच्चे का पूरा शरीर प्रभावित होता है - जबकि - कुछ मामलों में केवल बच्चे की आँखे ही प्रभावित होती हैं।
अल्बिनो (albinism) से प्रभावित बच्चों की आँखें दिखने में भूरी दिखती हैं। कभी-कभी आखें गुलाबी या लाल भी दिख सकती हैं।
यह इसलिए क्यूंकि आँखों की iris का रंग ही गुलाबी या लाल है - क्यूंकि iris पारदर्शी होने के कारण आँखों में मौजूद blood vessels के iris दीखता है।
अगर आप के शिशु को अल्बिनो (albinism) की समस्या है तो आप को कुछ सावधानियां बरतनी पड़ेगी।
शरीर में मौजूद मेलेनिन (melanin), त्वचा को धुप से बचता है। धुप से बचाने के लिए ही जब आप धुप में बहार निकलते हैं तो आप का रंग दब जाता है - इसका मतलब आप के शरीर में मौजूद मेलेनिन (melanin) सुचारु रूप से काम कर रहा है।
मेलेनिन (melanin) के आभाव में - यानि - अल्बिनो (albinism) से प्रभावित बच्चों को धुप से बचा के रखने की आवश्यकता है।
इस बीमारी से प्रभावित बच्चों को खास ख्याल रखने की आवश्यकता है की वे धुप में ज्यादा देर तक न खेलें।
अल्बिनो (albinism) से प्रभावित बच्चे जब भी घर से बहार निकालें तो उन्हें उचित मात्रा में सनस्क्रीन (sun-screen) लगा के निकालें - ताकि उनकी त्वचा तेज़ धुप की किरणों से बची रहें।
अल्बिनो (albinism) से प्रभावित कुछ बच्चों को दृष्टि की समस्या भी हो सकती है। ऐसे बच्चों को चस्मा लगाने की आवश्यकता पड़ सकती है।