
सूर्य की प्रत्येक किरणों के साथ हम अपने देश के उन वीर सैनिकों का नमन करते हैं , जिन्होंने हमें यह दिन दिखाया।
यह पर्व उमंग , उत्साह और उत्सव के साथ - साथ हमारे चिंतन का भी पर्व है। यह हमें प्रेरणा देता है , की हम अपने भारत को और अधिक सुदृढ़ , सुखी और समृद्ध बनाये।

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इसकी आज़ादी पर कोई आंच न आने दें। यह एक अविस्मरणीय दिन है , जिससे देश की अखंडता को बल मिलता है। वस्तुतः यह दिन हमारे संकल्प का दिन है।
इस दिन वतन पर मर मिटने वालों की याद हमें यह सन्देश देती है की हम भी उनके पद चिन्हों पर चल कर देश के गौरव को बनाए रखें।

15 अगस्त 1946 को जीवन का सन्देश लेकर स्वर्णिम रथ भारत की धरती पर उतरा और 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और भारत सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न गणतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया गया।

200 वर्षों की दासता के पश्चात् , हमारे देश वासी अपना स्वंतंत्र अस्तित्व और पहचान प्राप्त किये थे। यह हमारे क्रांतिकारियों और नेताओं का सपना था की भारत किसी के अंकुश में न रहे , भारत वासियों पर कोई अत्याचार न कर सके। भारत में एक प्रजातंत्र शासन लागू हो।

इस दिन के हर्ष - उल्लास के पीछे एक लक्ष्य है। अपने देश की अनेकता में एकता , अखंडता , दृढ़ता देश के विभिनं क्षेत्रों में नवीन उपलब्धि देश के उन्नति एवं विकास को दर्शाना।

26 जनवरी को जो जश्न और उत्सव मनाते है , क्या उससे हम अपने कर्तव् को पूरा करते हैं ? झाकियां निकाल लेने से और हर्ष प्रकट कर लेने से क्या इस दिन के महत्व को पूरी तरह से जान पाते हैं ?
हमारे शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी मिलेगी जब हम अपने देश के दायित्व को पूरा करेंगे।

हमे अपने बच्चों को यह बताना होगा की एक प्रभुत्व संपन्न गण राज्य की क्या आशा एवं आकांक्षाये हैं। क्या हम अपने देश के प्रति वाकई समर्पित हैं?
आज का प्रत्येक बच्चा और नवयुवक अपने अंदर इतनी ऊर्जा समेटे है की वह अपने देश के लिए बहुत कुछ कर सकता हैं बस ज़रुरत है उसे एक नई दिशा देने की।
सही मार्गदर्शन मिलने पर वह अपने देश की तस्वीर बदल सकता हैं। हमारे युवा वर्ग में इतना टैलेंट है की वे विदेशों में धूम मचा रहे हैं।
नई टेक्नोलॉजी के बल पर दूसरे देश का भविष्य बना रहे हैं। वह अपने देश का भविष्य और बेहतर बनाने के लिए एक नई सोच पैदा करें और अपने को इस देश का महत्वपूर्ण हिस्सा समझें। गणतंत्र दिवस के इस शुभ अवसर पर हम यह आशा करते हैं की-
यह बच्चे, जो की भारत का भविष्य हैं अपने तन , मन , और धन से अपने देश की सेवा के लिए कृत संकल्प हों।

विश्व गुरु कहलाने वाले भारत का प्रत्येक बच्चा यह संकल्प ले की:
- हमारी यह स्वतंत्रता अक्षुण्व बनी रहे।
- हम ईश्वर से यह प्रार्थना करते हैं की प्रत्येक नौजवान अपने अंदर एक नई सोच पैदा करे।
- नवीन भारत की कल्पना करें जिस की नीव भारतीय संस्कृति की जड़ों में हो।
- हम अपने को भारत का एक सैनिक और प्रहरी समझे।
- हमारा यह तिरंगा पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाए।
- इस तिरंगे के नीचे हम सब एक सुंदर भारत का निर्माण करें।