
अपने शिशु के लिए पौष्टिक आहार बनाने के लिए आपको Master Chef होने की आवश्यकता है। आप के रसोई में जो वस्तुएं पहले से मौजूद हैं उनकी ही मदद से आप बढ़िया, स्वादिष्ट और पौष्टिक शिशु आहार बना सकती हैं।
हालाँकि बाजार के ready-made शिशु आहार से आराम तो मिलता है, समय की बचत होती है और एक माँ की व्यस्त जिंदगी थोड़ी सी सरल भी हो जाती है।
मगर बाजार से खरदे हुए शिशु आहार उतने पौष्टिक नहीं होते हैं क्योँकि काफी उच्च तापमान पे उन्हें पकाया जाता है ताकि कई महीने तक वे बोतल/tin में सुरक्षित रह सकें।
उच्च तापमान पे शिशु आहार बनाते वक्त बहुत से vitamin और mineral भी नष्ट हो जाते हैं।
हम आप को बताएँगे 29 रोचक और पौष्टिक शिशु आहार बनाने की विधि जिसे आप का लाडला बड़े चाव से खायेगा।
ये सारे शिशु आहार को बनाना बहुत ही आसान है, इस्तेमाल की गयी सामग्री किफायती है और तैयार शिशु आहार बच्चों के लिए बहुत पौष्टिक है।
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बच्चे को ठोस आहार देने से पहले ये छह बातें सुनिश्चित कर लें
- क्या आपका बच्चा 6 महीने का हो गया है - जाने की 6 महीने से पहले बच्चे को ठोस आहार क्योँ नहीं देना चाहिए। छह महीने से पहले बच्चे को पानी भी नहीं देना चाहिए।
- क्या आप का बच्चा शारीरिक रूप से तैयार है ठोस आहार के लिए
- महत्वपूर्ण बातें जिनका आपको ख्याल रखना है आहार देते वक्त
- क्या आप ने पता किया की वो कौन-कौन से आहार हैं जिनसे बच्चे को एलेर्जी होने की सम्भावना रहती है
- क्या आपने शिशु को नया आहार देने सम्बन्धी तीन दिवसीय नियम के बारे में जाना
- क्या आप जानते हैं उन आहार के बारे में जिनसे बच्चे को गैस हो सकता है
बच्चे के 6 महीने पुरे होने पे ठोस आहार शुरू करते वक्त एक सामग्री से बने आहार बच्चे को दें। अगर बच्चे में आहार से कोई एलेर्जी उत्पन होगा तो तुरंत पता चल जायेगा की कौन सा आहार बच्चे को नहीं दिया जाना चाहिए। आप इस आहार को बच्चे को तीन महीने के अंतराल पे फिर से दे के देख सकती हैं।
तो आइये अब चलते हैं की शिशु आहार बनाने की विधि के बारे में बात करते हैं
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इस लेख में
- ~~~#1^^^गाजर की खिचड़ी @@@
- ~~~#2^^^सूजी का हलुआ @@@
- ~~~#3^^^मुंग दाल से शिशु आहार @@@
- ~~~#4^^^चावल की खिचड़ी@@@
- ~~~#5^^^लौकी की प्यूरी @@@
- ~~~#6^^^चावल का खीर @@@
- ~~~#7^^^आटे का हलुआ @@@
- ~~~#8^^^केले का smoothie@@@
- ~~~#9^^^मसूर दाल की खिचड़ी @@@
- ~~~#10^^^हरे मटर की प्यूरी @@@
- ~~~#11^^^केले का प्यूरी@@@
- ~~~#12^^^चावल का आहार@@@
- ~~~#13^^^अवोकाडो का प्यूरी@@@
- ~~~#14^^^शकरकंद की प्यूरी@@@
- ~~~#15^^^गाजर का प्यूरी@@@
- ~~~#16^^^कद्दू की प्यूरी@@@
- ~~~#17^^^गेहूं का दलीय@@@
- ~~~#18^^^रागी का खिचड़ी @@@
- ~~~#19^^^रागी डोसा @@@
- ~~~#20^^^पालक और याम से बना शिशु आहार@@@
- ~~~#21^^^लाल चुकंदर और काला अंगूर @@@
- ~~~#22^^^अवोकाडो और केले से बना शिशु आहार@@@
- ~~~#23^^^गाजर मटर और आलू से बना शिशु आहार@@@
- ~~~#24^^^पपीते का प्यूरी@@@
- ~~~#25^^^मछली और गाजर की प्यूरी@@@
- ~~~#26^^^सूजी उपमा @@@
- ~~~#27^^^दही चावल@@@
- ~~~#28^^^वेजिटेबल पुलाव @@@
- ~~~#29^^^इडली दाल @@@
anchorlink[1]anchorcloseगाजर की खिचड़ी

केले की तरह गाजर को भी "perfect food" की श्रेणी में गिना जाता है। वैसे तो गाजर खाने में खुदी ही बहुत crunchy, स्वादिष्ट और पौष्टिक है, इससे मिलाकर बना खिचड़ी भी बच्चों को बहुत पसंद आएगा। गाजर से बच्चों को मिलता है beta-carotene, फाइबर, विटामिन K, पोटैशियम और एंटीऑक्सिडेंट्स जिसके बहुत सारे फायदे हैं। गाजर की खिचड़ी से शिशु को खिचड़ी के साथ-साथ गाजर के भी फायदे मिलते हैं। गाजर की खिचड़ी बनाने की विधि
- बच्चे का उम्र: 6 माह से ऊपर के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: beta-carotene, फाइबर, Thiamin, विटामिन K, Niacin, पोटैशियम, विटामिन B6, फोलेट, मैनगनीज, Dietary Fiber और एंटीऑक्सिडेंट्स
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: गाजर की खिचड़ी बनाने की विधि
anchorlink[2]anchorcloseसूजी का हलुआ

सूजी का हलवा बनाने की बहुत सारी विधि है। मगर सूजी का हलवा अगर आप बहुत छोटे बच्चे के लिए बना रही हैं तो आप को कुछ विशेष बातों का ख्याल रखना होगा। सूजी या राव में प्रोटीन की आछी मात्र होती है जो बढते बच्चों के लिए बहुत फायेदेमंद है। इसके साथ-ही-साथ इससे बच्चे को मिलता है मैग्नीशियम, विटामिन B1, B2, B3, E, फोलिक एसिड, कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक, कॉपर, आयरन, फाइबर और कई प्रकार के मिनरल्स। सूजी का हलुआ बनाने की विधि
- बच्चे का उम्र: 6 माह से ऊपर के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: मैग्नीशियम, विटामिन B1, B2, B3, E, फोलिक एसिड, कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक, कॉपर, आयरन और फाइबर
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: सूजी का हलुआ बनाने की विधि
anchorlink[3]anchorcloseमुंग दाल से शिशु आहार

मुंग का दाल बहुत ही हल्का आहार है और आसानी से पच जाता है। यही वजह है की अगर बड़ों का तबियत ख़राब हो तो वे भी मुंग का दाल खाते हैं। 6 महीने के बच्चे का पाचन तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता है और चूँकि मुंग का दाल हल्का होता है - ये 6 माह के बच्चे के लिए perfect आहार है। मुंग का दाल बनान बहुत सरल है और इसमें बहुत सारे पौष्टिक तत्त्व होते हैं। मुंग के दाल के सेवन से शिशु के त्वचा में निखार आता है। तो अगर आप के शिशु का रंग दबा हुआ है तो मुंग का दाल खिलाना फायदेमंद रहता है। मुंग के दाल में प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट और फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। अगर आप के बच्चे को कब्ज (constipation) रहता है तो मुंग का दाल उसमे भी फायदेमंद है।
- बच्चे का उम्र: 6 माह से ऊपर के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट और फाइबर
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: मुंग का दाल बनाने की विधि
anchorlink[4]anchorcloseचावल की खिचड़ी

चावल की खिचड़ी उत्तर भारत में 6 महीने के बच्चे को दिया जाने वाला आम आहार है। चावल आराम से 6 माह के बच्चे को पच जाता है और उसे पसंद भी बहुत आता है। अगर आप का बच्चा खिचड़ी खाने से इंकार करे तो जबरदस्ती न खिलाये, बल्कि कुछ दिन रुक कर फिर से कोशिश करें। चावल उन चुनिंदा आहारों में से एक है जिनसे 6 month के बच्चे को एलेर्जी का कोई खतरा नहीं है। पोषण के मामले में चावल का कोई जवाब नहीं। इसमें मिलता है मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, मनगनीज, सेलेनियम, आयरन, folic acid, thiamine and niacin।
- बच्चे का उम्र: 6 माह से ऊपर के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, मनगनीज, सेलेनियम, आयरन, folic acid, thiamine and niacin
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: चावल की खिचड़ी बनाने की विधि
anchorlink[5]anchorcloseलौकी की प्यूरी

छह माह के बच्चे के लिए लौकी की प्यूरी सबसे उपयुक्त शिशु आहार है। इसमें ढेरों विटामिन, minerals और nutrients है जो बच्चे के पोषण के लिए अच्छा है। इसे 6 महीने का बच्चा आसानी से पचा सकता है और ये बच्चे में कब्ज होने से बचता है।
- बच्चे का उम्र: 6 माह से ऊपर के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: आयरन, फोलेट, antioxidant, विटामिन B और C, सोडियम, कैल्शियम, जिंक और पोटैशियम
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: लौकी की प्यूरी बनाने की विधि
anchorlink[6]anchorcloseचावल का खीर

शिशुओं में ठोस आहार शुरू करने के लिए खीर देना आम प्रथा है। इसके तीन कारण हैं। पहला - ये बहुत स्वदिष्ट होता है और नवजात शिशु को बहुत पसंद आता है। दूसरा - नवजात बच्चे का पाचन तंत्र पूरी तरह से विकसित नहीं होता है - इसलिए खीर सर्वोत्तम है क्योँकि ये आसानी से पच जाता है। तीसरा - इसमें भरपूर मात्रा मैं पोषक तत्त्व होता हैं।
- बच्चे का उम्र: 6 माह से ऊपर के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: पोटैशियम, आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, सोडियम, विटामिन A और C,
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: चावल का खीर बनाने की विधि
anchorlink[7]anchorcloseआटे का हलुआ

आटे का हलुआ शिशु में ठोस आहार शुरू करने के लिए सबसे बेहतरीन शिशु आहार है। शिशु में नया आहार शुरू करते वक्त उन्हें एक बार में एक ही आहार देना चाहिए। आटे का हलुआ बनाने के लिए सिर्फ एक ही ingredient का इस्तेमाल होता है - और एक 6 माह के शिशु आहार का ये सबसे महत्वपुर गुण है। बच्चे कोई भी नया आहार पहली बार दें तो तीन दिवसीय नियम का पालन अवश्य करें।
anchorlink[8]anchorcloseकेले का smoothie

केला तो वैसे ही बच्चों को बहुत पसंद आता है, और केले के smoothie का कोई जवाब नहीं। केला एक प्राकृतिक antacids है यानी ये आप के बच्चे का पेट रखगे ठीक। केला पौष्टिक तत्वों का जखीरा है और शिशु में ठोस आहार शुरू करने के लिए सर्वोत्तम आहार। केला बढ़ते बच्चों के सभी पौष्टिक तत्वों की जरूरतों (nutritional requirements) को पूरा करता है।
- बच्चे का उम्र: 6 माह से ऊपर के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: पोटैशियम, फाइबर, विटामिन B6, विटामिन C, विटामिन B2,
- सावधानी बरतें: कुछ बच्चों में केले से संवेदनशीलता और Latex एलेर्जी पाया गया है इसीलिए अगर पहली बार बच्चे को केला दें तो इस बात का ध्यान रखें।
- बनाने की विधि: केले का smoothie बनाने की विधि
anchorlink[9]anchorcloseमसूर दाल की खिचड़ी

मसूर दाल की खिचड़ी 9 से 12 महीने के बच्चों के लिए उपयुक्त है। नौ महीने से पहले शिशु को मसूर दाल और तूर दाल नहीं देना चाहिए क्योँकि इसे पचाने में छोटे बच्चों को थोड़ी परेशानी हो सकती है। मसूर दाल पुरे भारत वर्ष में हर घर में किसी-न-किसी रूप में बनाया जाता है। ये दाल जितना स्वादिष्ट है उतना ही पौष्टिक भी। छोटे बच्चों को मसूर दाल का पानी या मसूर दाल की खिचड़ी दे सकते हैं। ताकि छोटे बच्चे भी इसके फायदे से वंचित न रह जाएँ।
- बच्चे का उम्र: 9 से 12 माह के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट, जिंक, विटामिन D, फॉस्फोरस, आयरन, सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, सल्फर, आयोडीन, कॉपर,
- सावधानी बरतें: सदा मसूर दाल बच्चों को न दें। या तो मसूर दाल का पानी या मसूर दाल की खिचड़ी क्योँकि बच्चों में ये आसानी से नहीं पचता।
- बनाने की विधि: मसूर दाल की खिचड़ी बनाने की विधि
anchorlink[10]anchorcloseहरे मटर की प्यूरी (Pea puree)
 baby food.jpg)
मटर के दाने होते तो बहुत छोटे हैं मगर पौष्टिक के मामले में ये बहुत आगे हैं। इनमे Vitamins A and C, आयरन, प्रोटीन, and कैल्शियम भरपुरी में होता है। मटर में मौजूद Vitamins A और C बच्चे को स्वस्थ रखने में मदद करता है, आयरन बच्चे में नया खून बनाने में योगदान देता है, प्रोटीन से बच्चे की मासपेशियां बनती है और कैल्शियम बच्चे की हाड़ियोँ को मजबूती देता है। मटर की प्यूरी मैं मौजूद मटर के छिलके अगर आप के बच्चे को पसंद न आये तो मटर की प्यूरी बनाने से पहले मटर के छिलके निकल दें। इससे मटर की प्यूरी भी बहुत बारीक़ बनेगी।
- बच्चे का उम्र: 6 माह से ऊपर के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: विटामिन्स A और C, आयरन, प्रोटीन, और कैल्शियम
- सावधानी बरतें: हरे मटर से बच्चे को गैस होने की सम्भावना रहती है। शुरू में कम दें और धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ाएं
- बनाने की विधि: मटर की प्यूरी बनाने की विधि
anchorlink[11]anchorcloseकेले का प्यूरी (Banana Purée)
 शिशु आहार.jpg)
केले को "perfect food" कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योँकि बच्चे के बढ़ते शरीर के लिए जो भी पौष्टिक तत्वों की आवश्यकता वो सब केले मैं मौजूद है। इसके साथ-ही-साथ केले में antacids गुण भी हैं जिसकी वजह से केला पेट के लिए बहुत आच्छा है। केला में vitamin B6, manganese, vitamin C, potassium, dietary fiber, biotin, और कॉपर होता है। केला बच्चों के लिए बहुत अच्छा है मगर इसका मतलब यह नहीं की बच्चों को बहुत ज्यादा केला खिला दिया जाये। बहुत ज्यादा केला खाने से बच्चों को कब्ज (constipation) का खतरा रहता है।
- बच्चे का उम्र: 6 माह से ऊपर के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: विटामिन B6, manganese, विटामिन C, पोटैशियम, dietary fiber, biotin, और कॉपर
- सावधानी बरतें: ज्यादा केले खाने से कब्ज होने की सम्भावना है।
- बनाने की विधि: केले की प्यूरी बनाने की विधि
anchorlink[12]anchorcloseचावल का आहार (Brown Rice Cereal)
 शिशु आहार.jpg)
चावल छोटे बच्चों को दिया जाने वाला बहुत ही आम आहार है क्यूंकि इससे बच्चों को एलेर्जी का खतरा नहीं रहता और ये आराम से पच भी जाता है। पके हुए चावल को अगर थोड़े पानी या दूध के साथ पीस कर के जो आहार त्यार किया जाता है उसका इस्तेमाल आप कर सकते हैं बच्चे को तरल आहार से ज्यादा ठोस आहार के तरफ ले जाने में।
- बच्चे का उम्र: 6 माह से ऊपर के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: कार्बोहायड्रेट, प्रोटीन, magnesium, phosphorus, manganese, selenium, iron, folic acid, thiamine और niacin
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: चावल का आहार बनाने की विधि
anchorlink[13]anchorcloseअवोकाडो का प्यूरी (Avocado Purée)
 baby food.jpg)
अवोकाडो का प्यूरी मक्खन की तरह मुलायम और स्वादिष्ट होता है। इसमें 71 से 88 प्रतिशत तक वासा (fat) होती है। इसमें मौजूद वासा बच्चे के मस्तिष्क और शारीरिक विकास के लिए बहुत फायदेमंद है। इसका cream की तरह का texture बच्चों को बहुत पसंद आता है।
- बच्चे का उम्र: 6 माह से ऊपर के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: कार्बोहायड्रेट, प्रोटीन, magnesium, phosphorus, manganese, selenium, iron, folic acid, thiamine और niacin।
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: अवोकाडो का प्यूरी बनाने की विधि
anchorlink[14]anchorcloseशकरकंद की प्यूरी (Baked Sweet Potato Purée)
 शिशु आहार.jpg)
शकरकंद सेहत के फायदों के लिए जाना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन्स, antioxidants, और फाइबर होता है जो बच्चे के स्वस्थ के लिए बहुत फायदेमंद है। शकरकंद की प्यूरी को बनाने के लिए आप भुने या उबले शकरकंद को थोड़े पानी या दूध के साथ पीस सकते हैं। ये बहुत ही स्वादिष्ट और पौष्टिक शिशु आहार है।
- बच्चे का उम्र: 6 माह से ऊपर के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: विटामिन A (beta-carotene), vitamin C, मैनगिनीज, कॉपर, pantothenic acid and vitamin B6, पोटैशियम, dietary fiber, niacin, विटामिन B1, विटामिन B2 और फॉस्फोरस
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: शकरकंद की प्यूरी बनाने की विधि
anchorlink[15]anchorcloseगाजर का प्यूरी (Carrot Purée)
 शिशु आहार baby food.jpg)
बच्चों में ठोस आहार शुरू करने के लिए गाजर का प्यूरी एक बेहतरीन विकल्प है। यह प्राकृतिक रूप से मीठा और इसका texture बच्चों को बहुत पसंद आता है। इसे बनाना भी बहुत आसान है। गाजर में antioxidant beta कैरोटीन, फाइबर, पोटैशियम, विटामिन K और विटामिन A मिलता है।
बच्चे का उम्र: 6 माह से ऊपर के बच्चों के लिए
पौष्टिक तत्त्व: Antioxidant beta कैरोटीन, फाइबर, पोटैशियम, विटामिन K और विटामिन A
सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
बनाने की विधि: गाजर की प्यूरी बनाने की विधि
anchorlink[16]anchorcloseकद्दू की प्यूरी (Pumpkin Thyme Purée)
 शिशु आहार.jpg)
यह एक मौसमी रेसिपी है। कद्दू आप को साल भर नहीं मिलता इसीलिए कद्दू के मौसम में इसे अपने बच्चे को जरूर खिलाएं। कद्दू में अच्छी मात्रा में beta कैरोटीन, पोटैशियम, and आयरन होता है। इसे आप ज्यादा बनाकर फ्रिज में बाद के इस्तेमाल के लिए रख सकते हैं। कद्दू की प्यूरी को आप बर्फ ज़माने वाली ट्रे में रख कर फ्रिज में store कर सकते हैं।
- बच्चे का उम्र: 7 से 8 माह के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: विटामिन E (Alpha Tocopherol), Thiamin, Niacin, विटामिन B6, फोलेट, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, Dietary Fiber, विटामिन A, विटामिन C, Riboflavin, पोटैशियम, कॉपर और मैनगिनीज
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: कद्दू की प्यूरी बनाने की विधि
anchorlink[17]anchorcloseगेहूं का दलिया

गेहूं का दलीय पेट के लिए बहुत अच्छा और आसानी से पच जाता है। दलीय में प्रोटीन अच्छी मात्रा में होता है और इसके साथ ही इससे बच्चे के शरीर को बहुत प्रकार के नुट्रिएंट्स भी मिलता है। दलीय में मैग्नीशियम, फाइबर और कई प्रकार के मिनरल्स भी होते है।
- बच्चे का उम्र: 7 से 8 माह के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: प्रोटीन, मैग्नीशियम और फाइबर
- सावधानी बरतें: छोटे बच्चों को गेहूं से एलेर्जी का खतरा रहता है इसीलिए शुरू में थोड़स ही दें
- बनाने की विधि: गेहूं का दलीय बनाने की विधि
anchorlink[18]anchorcloseरागी का खिचड़ी

रागी दिखने में सरसों की तरह दीखता है और रागी का खिचड़ी बहुत ही पौष्टिक शिशु आहार है। इसमें बाकि अनाजों की तुलना मैं तीस गुना ज्यादा कैल्शियम होता है और साथ ही इसमें बहुत प्रकार के खनिज भी होते हैं। इसका मतलब बढ़ते बच्चों की हड्डियोँ को मजबूत करने के लिए रागी बहुत अच्छा शिशु आहार है। इसका नियमित आहार बच्चे को कुपोषण से बचा सकता है।
- बच्चे का उम्र: 7 से 8 माह के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: आयरन, कैल्शियम, एमिनो एसिड एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: रागी का खिचड़ी बनाने की विधि
anchorlink[19]anchorcloseरागी डोसा

रागी में भरपूर कैल्शियम होता है इसीलिए रागी का डोसा छोटे बच्चों के लिए एक अच्छा आहार है। कैल्शियम बच्चों के हड्डियोँ के विकास के लिए बहुत अच्छा है। चावल की तुलना में इसमें ज्यादा फाइबर होता है जो पाचन के लिए अच्छा है। रागी आयरन का भी अच्छा स्रोत है और इसमें विटामिन C भी होता है। विटामिन C शरीर में आयरन के अवशोषण में मदद करता है। रागी मैं मौजूद एमिनो एसिड एंटीऑक्सीडेंट शरीर को स्वाभाविक रूप से आराम देने में मदद करता है।
- बच्चे का उम्र: 7 से 8 माह के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: आयरन, कैल्शियम, एमिनो एसिड एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: रागी का खिचड़ी बनाने की विधि
anchorlink[20]anchorcloseपालक और याम से बना शिशु आहार (Spinach with White Yams)

पालक और याम का गठजोड़ भरपूर मात्रा मैं बच्चे को कैल्शियम, आयरन, विटामिन A, और फोलेट प्रदान करता है। याम की वजह से इस शिशु आहार में थोड़ी सी मिठास आ जाती है।
- बच्चे का उम्र: 7 से 8 माह के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: कैल्शियम, आयरन, विटामिन A, और फोलेट
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: पालक और याम बनाने की विधि
anchorlink[21]anchorcloseलाल चुकंदर और काला अंगूर

यह बहुत ही खूबसूरत लाल रंग का शिशु आहार है। लेकिन उससे भी बेहतरीन बात यह है की इसमें प्रचुर मात्रा में antioxidants, विटामिन्स, and फाइबर है जो बच्चे के लिए बहुत अच्छा है। इसे आप थोड़े से चावल के साथ मिलाके भी बच्चे को खिला सकती हैं।
- बच्चे का उम्र: 7 से 8 माह के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: Antioxidants, विटामिन्स, and फाइबर
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: लाल चुकंदर और काला अंगूर बनाने की विधि
anchorlink[22]anchorcloseअवोकाडो और केले से बना शिशु आहार

यह एक बेमिसाल जोड़ी है। जहाँ एक और अवोकाडो में स्वास्थवर्धक वासा (fat) वहीँ केले में पोटैशियम और विटामिन C है। केले की वजह से इस शिशु आहार में थोड़ी से मिठास आ जाती है। बच्चों को जितना हो सके नमक और चीनी नहीं देना चाहिए। उस हिसाब से प्राकृतिक मिठास से युक्त ये आहार बच्चों के लिए बहुत अच्छा है।
- बच्चे का उम्र: 7 से 8 माह के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: पोटैशियम और विटामिन C, वासा (heathy fat)
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: अवोकाडो और केले से शिशु आहार बनाने की विधि
anchorlink[23]anchorcloseगाजर मटर और आलू से बना शिशु आहार

इस शिशु आहार को बनाया गया है आलू, हरा मटर, और गाजर के साथ। बेहद स्वादिस्ट, इसे आप पाना पाएंगी सिर्फ 8 minute में। ये वाकई एक बेहतरीन तरीका है अपने बच्चे के आहार के पोषक तत्वों को समलित करने का।
- बच्चे का उम्र: 7 से 8 माह के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: प्रोटीन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन, जिंक, आयोडीन, मैगनेसियम, पोटैशियम, mega-3 fatty acids और बहुत से विटामिन्स जैसे की D and B2 (riboflavin)
- सावधानी बरतें: कुछ बच्चों को मछली से एलेर्जी हो सकता है इसीलिए पहली बार थोड़ा सा ही दें
- बनाने की विधि: मछली से बना शिशु आहार बनाने की विधि
anchorlink[24]anchorcloseपपीते का प्यूरी (Papaya Purée)

पपीते में बाकि फलों की तुलना में ज्यादा acidity होता है। इसीलिए बेहतर है की जब तक आप का शिशु सात से आठ महीने का न हो जाये तब तक उसे पपीता या पपीते से बने आहार न दें। पपीते में मौजूद enzymes पाचन के लिए बहुत अच्छा है। अगर आप के बच्चे को कब्ज या पेट से सम्बंधित परेशानी है तो पपीते का प्यूरी सबसे बढ़िया विकल्प है।
- बच्चे का उम्र: 7 से 8 माह के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: Antioxidant , carotenes, विटामिन C and फ्लवोनोइड्स, विटामिन्स B, फोलेट, pantothenic acid, पोटैशियम, कॉपर, और मैग्नीशियम और फाइबर
- सावधानी बरतें: जब तक बच्चा 7 से 8 month का न हो जाये तब तक न दें
- बनाने की विधि: पपीते का प्यूरी आहार बनाने की विधि
anchorlink[25]anchorcloseमछली और गाजर की प्यूरी

इस शिशु आहार का स्वाद में कोई जवाब नहीं - मगर सवाद के साथ-साथ ये दिमाग के विकास के लिए एक बहुत ही बेहतरीन शिशु आहार है। इस शिशु आहार को बच्चे को तब दें जब बच्चा 9 to 12 Months का हो जाये। मछली में omega-3 fatty acids पाया जाता है जो बच्चे के central nervous system के विकास अच्छा है। गाजर में ढेर सारा antioxidant होता है। अभी जब बच्चा बहुत ही तीव्र गति से विकास कर रहा है तब उसे बहुत सरे पोषक तत्वों की आवश्यकता है। ये आहार बच्चे की उस आवश्यकता को पूरी करता है।
- बच्चे का उम्र: 9 से 12 माह के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: Antioxidant , carotenes, विटामिन C and फ्लवोनोइड्स, विटामिन्स B, फोलेट, pantothenic acid, पोटैशियम, कॉपर, और मैग्नीशियम और फाइबर
- सावधानी बरतें: जब तक बच्चा 9 month का न हो जाये तब तक न दें
- बनाने की विधि: मछली और गाजर की प्यूरी बनाने की विधि
anchorlink[26]anchorcloseसूजी उपमा

सूजी का उपमा या रवा उपमा बेहद पौष्टिक और बनाने में आसान व्यंजन है जिसे आप अपने 9 month के बच्चे को भी दे सकती हैं। सूजी पेट के लिए बहुत आरामदायक है। बच्चे को अगर बुखार है या बच्चे का पेट ख़राब है तो भी सूजी से बने आहार आप बच्चे को दे सकती हैं। सूजी में गेहूं के सारे गुण होता हैं जैसे की विटामिन B1, B2, B3, E, फोलिक एसिड, कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक, कॉपर, आयरन, और फाइबर।
- बच्चे का उम्र: 9 से 12 माह के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: विटामिन B1, B2, B3, E, फोलिक एसिड, कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक, कॉपर, आयरन, और फाइबर।
- सावधानी बरतें: जब तक बच्चा 9 month का न हो जाये तब तक न दें
- बनाने की विधि: सूजी का उपमा बनाने की विधि
anchorlink[27]anchorcloseदही चावल

दही चावल या कर्ड राइस (curd rice) बड़ों के लिए हर मर्ज की दवा है। चाहे पेट खरब हो या खाने में बहुत गरिष्ट आहार लिया हो - दही चावल सब ठीक कर देगा। दही चावल सिर्फ बड़ों के लिए ही नहीं, बच्चों के लिए भी बहुत काम का आहार है। दही पाचन तंत्र को दरुस्त रखता है। ये pro-biotic और antibiotics का प्राकृतिक विकल्प है और शिशु को बुखार से बचाता है। इसमें भरपूर मात्रा में स्वस्थ वासा (healthy fat), कैल्शियम और प्रोटीन होता है। दही चावल बच्चे के immune system को मजबूत बनाता है। सबसे अच्छी बात यह है की दही चावल दूसरे आहारों से विटामिन्स और मिनरल्स को अवशोषित (absorb) करने में शरीर की मदद करता है।
- बच्चे का उम्र: 9 से 12 माह के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: विटामिन B1, B2, B3, E, फोलिक एसिड, कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक, कॉपर, आयरन, और फाइबर।
- सावधानी बरतें: दूध से बने उत्पाद से बच्चों को एलेर्जी होने की सम्भावना रहती है
- बनाने की विधि: दही चावल बनाने की विधि
anchorlink[28]anchorcloseवेजिटेबल पुलाव

वेजिटेबल पुलाव सभी को पसंद आने वाला व्यंजन है। चूँकि इसमें मौसम के अनुसार कई प्रकार के सब्जियों (vegetables) का इस्तेमाल होता है, पौष्टिकता के मामले में इसका कोई मिक़बला नहीं है। कई सब्जियों के होने साई इसमें कई प्रकार के विटामिन्स, मिनरल्स और पौष्टिक तत्त्व होता है। जो बच्चे खाने को लेकर बहुत ना-नुकुर करते (picky eaters) हैं उन्हें भी वेजिटेबल पुलाव बहुत पसंद आएगा।
- बच्चे का उम्र: 9 से 12 माह के बच्चों के लिए
- पौष्टिक तत्त्व: कई प्रकार के विटामिन्स, मिनरल्स और पौष्टिक तत्त्व (nutrients)
- सावधानी बरतें: कुछ भी नहीं
- बनाने की विधि: वेजिटेबल पुलाव बनाने की विधि
anchorlink[29]anchorcloseइडली दाल

इडली चटनी और सांबर के साथ बहुत स्वादिष्ट लगती है - मगर जब आप बच्चे को इसे दें तो सादे दाल के साथ दें। इडली में भरपूर मात्रा मैं प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहायड्रेट होता है। इसके साथ इडली में आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और विटामिन A भी होता है। दाल से बच्चे को molybdenum और फोलेट मिलता है। साथ ही दाल में कॉपर, फॉस्फोरस, मैनगनीज, आयरन, प्रोटीन, विटामिन B1, pantothenic acid, जिंक, पोटैशियम, विटामिन B6 जैसे पोषक तत्त्व भी मिलता हैं।