
वेरिसेला वैक्सीन, छोटी माता, या चिकन पॉक्स बेहद संक्रामक बीमारी है। यह varicella-zoster virus (VZV) नमक जीवाणु के संक्रमण से बनता है। इए के संक्रमण से शिशु के पुरे शारीर पे दानेदार चकते निकल आटे हैं जिन में पानी भरा होता है। संक्रमित बच्चे को बुखार और थकन लगता है। शिशु के लिए चिकन पॉक्स होना बहुत चिंता का विषय है। इसका संक्रमण एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति को हवा के द्वारा - संक्रमित व्यक्ति के खासने से फैलता है।
वेरिसेला (छोटी माता) - डोज़ (dose) - Schedule of immunization
- पहली खुराक - 1 वर्ष की उम्र में
- दूसरी खुराक - 15-18 महीने की उम्र में
चिकन पॉक्स का टीका क्योँ दिया जाता है?
वेरिसेला वैक्सीन शिशु को चिकन पॉक्स के संक्रमण से बचाता है। यह शिशु के लिए काफी सुरक्षित है और संक्रमण के रोकथाम में बहुत प्रभावी ही।
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चिकन पॉक्स का टीका - सावधानी (precuations)
अगर आप का शिशु बीमार है तो उसे चिकन पॉक्स का टीका तब तक न लगवाएं जब तक की वो पूरी तरह स्वस्थ न हो जाये।
वेरिसेला वैक्सीन (छोटी माता) - दुष्प्रभाव (side effects)
वेरिसेला वैक्सीन या चिकन पॉक्स के वैक्सीन से घम्भीर साइड इफेक्ट्स / दुष्प्रभाव होना एक बेहद दुर्लभ बात है। लेकिन थोड़े बहुत साइड इफेक्ट्स / दुष्प्रभाव देखे जा सकते हैं। रिसेला वैक्सीन या चिकन पॉक्स के वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स / दुष्प्रभाव यह हैं:
- शारीर के जिस अंग में टीके लगाये जाते हैं उस अंग में दर्द और सुजन
- बुखार - जो कुछ समय बाद स्वता चला जायेगा।
- शारीर पे हल्के लाल चकत्ते
- कुछ समय के लिए जोड़ों में दर्द
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वेरिसेला वैक्सीन (छोटी माता) का टीका किन बच्चों को नहीं लगाया जाना चाहिए
अगर आप के शिशु को चिकन पॉक्स के वैक्सीन के पहले डोज में ही जानलेवा allergic reaction हुवा हो तो अपने शिशु को चिकन पॉक्स का वैक्सीन न लगवाएं।
टीकाकरण चार्ट - 2018 के अनुसार निर्धारित समय पे टीका लगवाते वक्त अगर आप का शिशु बीमार है तो तब तक शिशु को टीका न लगवाएं जब तक की आप का शिशु पूर्ण रूप से ठीक न हो जाये।