
माँ बनना एक बहुत ही गौरव वाली बात है। सबको ये सौभाग्य प्राप्त नहीं होता है।
लेकिन गर्भावस्था से गुजरना इतना आसन भी नहीं है। गर्भावस्था में शारीर अनेक प्रकार के बदलावों से गुजर रहा होता है ताकि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए उचित शारीरिक माहौल तयार हो सके।
और इसकी वजह से एक माँ को कई प्रकार के साइड इफेक्ट्स (side effect) का सामना करना पड़ता है – जैसे उलटी, जी मचलना, गैस की समस्या और पल-पल मूड का बदलना।
इस लेख में हम विस्तार से बात करेंगे की प्रेगनेंसी में गैस की समस्या से कैसे निपटा जाये।
इस लेख में:
- ~~~#1^^^प्रेगनेंसी में गैस से बचाव @@@
- ~~~#2^^^प्रेगनेंसी में गैस क्योँ बनता है?@@@
- ~~~#3^^^क्या गैस प्रेगनेंसी के अंतिम के कुछ महीनो में भी होता है?@@@
- ~~~#4^^^गर्भावस्था के दौरान गैस बन्ने के अन्य कारण @@@
- ~~~#5^^^कब्ज की समस्या – constipation@@@
- ~~~#6^^^आहारों के प्रति संवेदन शीलता @@@
- ~~~#7^^^पेट में बैक्टीरिया@@@
- ~~~#8^^^शाररिक वजन का बढ़ना @@@
- ~~~#9^^^पेट में गैस बन्ने के अन्य वजह @@@
- ~~~#10^^^कार्बोहायड्रेट वाले आहार @@@
- ~~~#11^^^आहार जिनसे गैस की समस्या होती है@@@
- ~~~#12^^^गर्भावस्था के दौरान गैस का चिकित्सीय उपचार @@@
- ~~~#13^^^गर्भावस्था के दौरान गैस का घरेलु उपचार @@@
anchorlink[1]anchorcloseप्रेगनेंसी में गैस से बचाव
- कार्बोहायड्रेट वाले तरल आहारों से बचें।
- तेल में तली हुई आहार कम कर दें जैसे की चिप्स, भुजिया सब्जियां।
- गिलास से पानी पियें बिना स्ट्रॉ के मदद से।
- दिन भर में तीन बड़े आहारों के बजाये, दिन-भर थोड़े-थोड़े अंतराल पे थोडा-थोडा खाते रहें।
- एक्सरसाइज (Exercise) करें, इससे आप शारीरिक रूप से फिट रहेंगी और आप का पाचन तंत्र भी मजबूत बनेगा।
- अपने कमर पे कसे हुए कपडे ना पहने।
- बहुत ज्यादा मीठे आहारों और मिठाइयों का सेवन नहीं करें।
- दिन भर में खूब पानी पिए। इससे आप को कब्ज की समस्या से आराम मिलेगा।
- धीरे-धीरे खायें और अच्छी तरह से चबा-चबा कर खाना खायें।
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anchorlink[2]anchorcloseप्रेगनेंसी में गैस क्योँ बनता है?

आप के गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास जैसे-जैसे होता है, वो अपने आकर में बढ़ता है। अगर आप का शारीर लचीला नहीं होगा तो शिशु आप के गर्भ में बढ़ नहीं पायेगा और छोटे से जगह में दब कर के रह जायेगा।
इस स्थिति से निपटने के लिए आप के शारीर में progesterone नमक हॉर्मोन का निर्माण होता है। ये हॉर्मोन आप के शारीर की मस्पेशियौं को बहुत लचीला बना देते है ताकि जैसे जैसे शिशु आकर में बढे, आप का शारीर उसी के अनुपात में फ़ैल सके और बच्चे के लिए उचित जगह बना सके।
लेकिन इसका आसार आप के पेट के पाचन तंत्र पे भी पड़ता है। आप का पाचन तंत्र सुस्त पड़ जाता है जिस वजह से आहार को पचाने में अब समय लगता है।
और इस कारण पेट में गैस बनना प्रारंभ हो जाता है। खट्टी डकार और बार-बार गैस बन्ने की समस्या इसी का नतीजा है।

anchorlink[3]anchorcloseक्या गैस प्रेगनेंसी के अंतिम के कुछ महीनो में भी होता है?
हाँ, बिलकुल। प्रेगनेंसी के अंतिम चरण में हार्मोनल बदलाव अपने चरम पे होता है और uterus बहुत बढ़ चूका होता है।
पाचन तंत्र के लिए जगह बहुत थोड़ी सी बची होती है और इसका प्रभाव पाचन तंत्र पे पड़ता है। हर बार आहार ग्रहण करने के बाद आप को bloating की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। हार्ट बर्न (heartburn), acidity और constipation इन्ही सब का नतीजा है।
anchorlink[4]anchorcloseगर्भावस्था के दौरान गैस बन्ने के अन्य कारण
इन बातों के आलावा भी और बहुत कारणों से आप के पेट में गैस बन सकता है। इन सभी कारणों के बारे में हम आप को थोडा संचिप्त में बताते हैं।

anchorlink[5]anchorcloseकब्ज की समस्या – constipation
गर्भावस्था के दौरान आहार पाचन तंत्र में बहुत समय तक पड़ा रहता है। ऐसा इस लिए होता है ताकि fetus आहार से सारे पोषक तत्वों को सोख सके, यहाँ तक की पानी भी। लेकिन इस वजह से मल बहुत सूख जाती है और मल त्याग के दौरान बहुत दिक्कत आती है। इसका नतीजा होता है कब्ज और पेट में गैस की समस्या।
anchorlink[6]anchorcloseआहारों के प्रति संवेदन शीलता
कुछ आहार तुलनात्मक रूप से ज्यादा गैस की समस्या के लिए प्रसिद्ध हैं। उदहारण के लिए जो लोग celiac रोग से पीड़ित हैं उन्हें गेहूं से बने आहार पचाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गेहूं या gluten वाले आहार इनमें गैस की समस्या पैदा कर सकते हैं।
इसी तरह से जिन लोगों को lactose intolerance की समस्या है उन्हें दूध उत्पादों से बने आहार ग्रहण करने में काफी समस्या का सामना करना पड़ता है।

दूध उत्पाद इन लोगों में गैस की समस्या पैदा कर सकता है। ऐसा इस लिए क्यूंकि इन लोगों का शारीर इतना lactase पैदा नहीं करता है lactose को पूर्ण रूप से हजम किया जा सके।
anchorlink[7]anchorcloseपेट में बैक्टीरिया
हमारे पुरे शारीर में किसी भी वक्त अनगिनत बैक्टीरिया होते हैं। इन बैक्टीरिया का हमारे जीवित रहने और हमारे स्वस्थ रहने में बहुत बड़ा योगदान है।
हमारे शारीर में दो प्रकार के बैक्टीरिया होते हैं एक अच्छे और एक बुरे। अच्छे बैक्टीरिया हमारे शारीर में बुरे बैक्टीरिया को बढ़ने नहीं दते हैं।
यूँ समझ लीजिये की वे हमारे शारीर को बुरे बैक्टीरिया से रक्षा करते हैं। केवल रक्षा ही नहीं वरन हमारे शारीर के बहुत सारे कार्यौं में हाथ-भी बाटते हैं।

उदहारण के लिए आहारों को पचाने के लिए हमारे पाचन तंत्र की मदद भी करते हैं। लेकिन अगर हमारे शारीर में इन अच्छे बैक्टीरिया की कमी हो जाये तो बुरे बैक्टीरिया की संख्या तेज़ी से बढ़ने लगती है।
इसका सबसे बुरा प्रभाव पड़ता है हमारे पाचन तंत्र पे और रख्सा प्रणाली पे। जब बैक्टीरिया आहारों को पचाने में मदद ना करे तो पाचन में बहुत समय लग जाता है।
इस दौरान पाचन तंत्र में पड़े आहारों पे बुरे बैक्टीरिया के प्रभाव से गैस और कब्ज जैसी समस्या पैदा हो जाती है।
anchorlink[8]anchorcloseशाररिक वजन का बढ़ना
गर्भावस्था के दौरान भूख बहुत लगती है और इस वजह से दिन-भर कुछ-ना कुछ खाने की इक्षा होती है। पोषक आहार के साथ vitamin supplements लेने से आप का वजन बहुत तेजी से बढ़ सकता है। और ये आपको आलसी भी बना सकता है। शारीरिक क्रिया ज्यादा ना होने से गैस और अपच की समस्या होना आम बात है।

anchorlink[9]anchorcloseपेट में गैस बन्ने के अन्य वजह
इसके आलावा भी आप के पाचन तंत्र में कई तरह स एग्स पहुँच सकता है। उदहारण के लिए आहार ग्रहण करते समय हवा गटक लेना।
पाचन तंत्र में पड़े आहार पे बुरे बैक्टीरिया के प्रभाव से गैस का बनना। इस तरह की अधिकांश गैस डकार दुवारा निकल जाती है। लेकिन गैस की समस्य वो पैदा करती है जो गैस पेट (colon) तक पहुंचती है।
anchorlink[10]anchorcloseकार्बोहायड्रेट वाले आहार
कार्बोहायड्रेट वाले आहार बहुत ज्यादा गैस का निर्माण करते हैं। प्रोटीन और वासा वाले आहार उतना गैस का निर्माण नहीं करते हैं।

वासा वाले आहार पाचन की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं। इससे पेट के खली होने में बहुत समय लग जाता है – नतीजा पेट में गैस का बनना।
anchorlink[11]anchorcloseआहार जिनसे गैस की समस्या होती है
- कुछ सब्जियां जैसे पत्ता गोभी, फूलगोभी, बोडा, प्याज, ब्राकोली, इत्यादि। इनमें मौजूद कुछ प्रकार के कार्बोहायड्रेट आसानी से पचते नहीं हैं। इस वजह से sulfur-filled गसों का निर्माण होने लगता है जो बहुत बदबू करता है।
- दलहन (दाल) जैसे की चने का डाल, चना, अरहर की डाल, और लगभग प्रायः सभी प्रकार के दाल। इनमें फाइबर की मात्र बहुत होती है। आहारों के दुवारा बहुत ज्यादा फाइबर ग्रहण करने से गैस की समस्या हो सकती है। कुछ लोगों में फाइबर पेट में फसे गैस को बहार निकलने में मुश्किल बना देता है।
- बीज वाले आहार जैसे की sunflower, poppy, और fennel पाचन तंत्र में गैस का निर्माण करते हैं।
- फल जैसे की सेब, आम, किशमिस, तरबूज, में भी कुछ ऐसे कार्बोहायड्रेट होते हैं जो पचते नहीं हैं और पेट में गैस का निर्माण करते हैं। फलों में मौजूद Fructose भी पेट में गैस बन्ने का बहुत बड़ा कारण है।
- सॉफ्ट ड्रिंक, बियर और दारू की वजह से पेट में गैस पहुँच जाता है जो पूरी तरह से डकार के जरिये नहीं निकलता है।
- गेहूं से बने उत्पाद की वजह से पेट में किण्वन की प्रक्रिया होती है। किण्वन की प्रक्रिया में पेट में बहुत मात्र में गैस बनता है।
anchorlink[12]anchorcloseगर्भावस्था के दौरान गैस का चिकित्सीय उपचार
गर्भावस्था के दौरान अधिकांश मामलों में स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती है की चिकित्सीय मदद की जरुरत पड़े। शिशु के जन्म के बाद गैस की समस्या स्वता ही समाप्त हो जाती है।
anchorlink[13]anchorcloseगर्भावस्था के दौरान गैस का घरेलु उपचार
अनेक प्रकार के घरेलु हेर्ब्स के दुवारा गैस की समस्या से बहुत हद तक निजत पाया जा सकता है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार की घरेलु औषधि लेने से पूर्व अपने डोक्टर से जरूर संपर्क कर लें। कहीं ऐसा ना हो की इनका आप के गर्भ में पल रहे बच्चे पे बुरा प्रभाव पड़े।

घरों में मिलने वाली बहुत सी घरेलु औषधि ऐसे हैं जो birth defects के लिए जानी जाती हैं – इसीलिए कुछ भी लेने से पहले पूरी सतर्कता बरतें।