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टेटनस और डिप्थीरिया बहुत ही भयंकर और जानलेवा बीमारी है। दोनों बीमारी में से किसी के भी संक्रमण से शिशु में शारीरिक जटिलताएं पैदा हो जाती हैं। टीडी (टेटनस, डिप्थीरिया) का वैक्सीन शिशु को इन दोनों बीमारियोँ से बचाता है।
टीडी (टेटनस, डिप्थीरिया) - डोज़ (dose) - Schedule of immunization
- 10 वर्ष की उम्र में
टेटनस और डिप्थीरिया दोनों ही संक्रामक बीमारियां है जो जीवाणु द्वारा फैलती है। डिप्थीरिया का संक्रमण एक व्यक्ति से दुसरी व्यक्ति को खाँसी या छींकने के द्वारा फैलता है। जब की टेटनस के जीवाणु (bacteria) शरीर में प्रवेश करता है जब शरीर में कोई खरोंच लग जाये, कट जाये इस जब कोई घाव बन जाये।
टेटनस के संक्रमण से पुरे शरीर की मांसपेशियोँ में जकड़न हो जाती है। सर और गर्दन में इतनी ज्यादा जकड़न होती है की संक्रमित व्यक्ति खाने और घोटने में पूरी तरह से असमर्थ हो जाता है यहां तक की कभी कभी साँस लेना भी मुश्किल होता जाता है।

टेटनस के संक्रमण के बाद बेहतर से बेहतर इलाज के बावजूद भी हर दस में से एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।
डिफ्थीरिया को गलघोंटू नाम से भी जाना जाता है। डिफ्थीरिया का संक्रमण कॉरीनेबैक्टेरियम डिफ्थीरिया नमक जीवाणु के संक्रमण से फैलता है। अगर इसका इलाज समय पे न किया जाये तो यह पुरे शरीर में फ़ैल सकता है। डिफ्थीरिया का बैक्टीरिया मुख्यता टांसिल व श्वास नली को संक्रमित करता है। संक्रमण के कारण टांसिल व श्वास नली में एक प्रकार की झिल्ली बनती है जिसकी वजह से संक्रमित व्यक्ति का साँस लेना मुश्किल हो जाता है।
इसीलिए आवश्यक है की हर बच्चे को टीकाकरण चार्ट - 2018 के अनुसार समय पे टीका लगवाया जाये और बच्चे को तथा देशो को टेटनस, डिप्थीरिया की महामारी से बचाया जा सके।
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यह टीका क्योँ दिया जाता है?
टीडी (टेटनस, डिप्थीरिया) का वैक्सीन शिशु को टेटनस और डिप्थीरिया के संक्रमण से बचाता है। टीडी के वैक्सीन (Td vaccine) का booster dose हर 10 साल पे देना चाहिए ताकि बच्चे के शरीर में टेटनस और डिप्थीरिया के प्रति immunity बनी रहे।
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टीडी के वैक्सीन (Td vaccine) से सम्बंधित सावधानियां (precuations)
- शिशु अगर बीमार हो तो जब तक वह पूरी तरह से स्वस्थ न हो जाये उसे तब तक उसे टीडी के वैक्सीन (Td vaccine) नहीं देना चाहिए।
- टीडी का वैक्सीन (Td vaccine) देने के पश्च्यात अगर शिशु में गंभीर परिणाम दिखे तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
- बहुत ज्यादा सूजन, गंभीर दर्द, खून का बहना उस जगह से जहा पे टिके का shot दिया गया है। इस स्थिति में भी तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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टीडी के वैक्सीन (Td vaccine) से दुष्प्रभाव (side effects)
टीडी का वैक्सीन (Td vaccine) से शिशु में किसी भी प्रकार के गंभीर दुष्प्रभाव का होना एक बहुत ही दुर्लभ बात है। मगर कुछ हलके फुल्के दुष्प्रभाव (side effects) देखने को मिल सकते हैं जैसे की:
- शरीर में उस जगह पे दर्द जहाँ पे टिके का shot दिया गया है
- त्वचा का लाल होना या सूजन का होना जिस जगह पे टिके का shot दिया गया है
- सर दर्द
- थकान
- 102°F तापमान से ज्यादा बुखार होने।
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टीडी के वैक्सीन (Td vaccine) का टीका किन बच्चों को नहीं लगाया जाना चाहिए
अगर आप के शिशु को पहले कभी टेटनस और डिप्थीरिया वाले टीके से जान लेवा एलर्जिक प्रतिक्रिया (allergic reaction) का सामना करना पड़ा हो तो फिर अपने शिशु को टीडी का वैक्सीन (Td vaccine) न लगवाएं।