
बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए और उनकी हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए विटामिन डी बहुत महत्वपूर्ण है। शिशु के लिए विटामिन डी इतना महत्वपूर्ण है कि अगर इसकी कमी हो जाए शरीर में तो यह जानलेवा भी हो सकता है।
शिशु के लिए जन्म से पहले कुछ साल बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दौरान शिशु का शारीर बहुत तेजी से विकास करता है। इस दौरान शिशु की हड्डियां, रीड की हड्डी और शरीर के अन्य तंत्रों कभी विकास होता है जिसके लिए विटामिन डी बहुत आवश्यक है।
इस दौरान अगर विटामिन डी की कमी हो जाए तो शिशु के शरीर में हड्डियों का निर्माण अच्छी तरह नहीं होता है और अन्य बच्चों की मुकाबले उनकी हड्डियां उतनी मजबूत नहीं होती है। कुछ बच्चों में विटामिन डी की कमी की वजह से रिकेट्स नामक बीमारी होती है।
यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की मांसपेशियों में ऐंठन होना शुरू होता है जिसकी वजह से पैरों का आकार धनुष जैसा हो जाता है। शिशु के शरीर में विटामिन डी की कमी को बहारों के द्वारा पूरा किया जा सकता है।
इस लेख में:
- बच्चों में रिकेट्स बीमारी
- क्यों होता है बच्चों में रिकेट्स बीमारी
- विटामिन डी क्या होता है
- विटामिन डी क्या करता है
- क्यों बच्चों के लिए जरूरी है विटामिन डी
- शिशु को किन सोत्रों से विटामिन डी मिलता है
- शिशु के शरीर में विटामिन डी से संबंधित सावधानियां
- विटामिन डी से भरपूर आहार
- महिलाओं के शरीर में विटामिन डी की कमी के नुकसान

बच्चों में रिकेट्स बीमारी
रिकेट्स बच्चों में हड्डियों से संबंधित एक प्रकार का विकार है जिससे शरीर की हड्डियां बहुत नाजुक हो जाती है। और नाजुक होने की वजह से ये शरीर के भार को सहन नहीं कर पाती है और इसमें व्कृति आना प्रारंभ हो जाता है।
रिकेट्स वजह से फ्रैक्चर का खतरा भी बढ़ जाता है।विकासशील देशों की तुलना में विकसित देशों में यह बीमारी बहुत दुर्लभ है। लेकिन कई विकासशील देशों में यह एक सामान्य बीमारी मानी जाती है जिसकी मुख्य वजह है विटामिन डी की कमी।
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क्यों होता है बच्चों में रिकेट्स बीमारी
जैसा कि हमने पहले बताया कि रिकेट्स की मुख्य वजह है शरीर में विटामिन डी की कमी। यह तब होता है जब शिशु को पर्याप्त मात्रा में उसके आहार से विटामिन डी नहीं मिल पाता है।
शिशु के प्रथम की कुछ वर्ष बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इन वर्षों में यह आवश्यक है कि आप अपने शिशु को हर प्रकार के आहार प्रदान करें जिससे शिशु के शरीर को हर प्रकार का पोषण मिल सके। अगर आप किसी को एक ही प्रकार का आहार खिलाएंगे तो शिशु को केवल एक ही प्रकार का पोषण मिलेगा।

लेकिन शिशु के विकास के लिए विशेषकर प्रथम के कुछ वर्षों में हर प्रकार के पोषण की आवश्यकता होती है। इसीलिए अपने शिशु को मौसम के अनुसार फल और सब्जियां खिलाएं जिससे उसे हर वह पोषक तत्व मिल सके जिसकी उसके शरीर को आवश्यक।
शिशु को जब उसके आहार के माध्यम से पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी और कैल्शियम नहीं मिल पाता है तब उसे रिकेट्स बीमारी का सामना करना पड़ता है। अभी कुछ ही दिनों पहले कोई शोध में यह भी सामने आया है कि जिन बच्चों में विटामिन डी की कमी होती है उनमें अस्थमा का खतरा भी बहुत बढ़ जाता है।
अगर गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में विटामिन डी की कमी हो तो होने वाले शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी बहुत ज्यादा असर पड़ता है। इसीलिए इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि विटामिन डी गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए बहुत आवश्यक है।
अगर आपका शिशु पूरी तरह से स्तनपान पर निर्भर है तो आप इस बात का ध्यान रखें कि आप अपने आहार में ऐसे फल सब्जियों को सम्मिलित करें जिनमें प्रचुर मात्रा में विटामिन डी पाया जाता है ताकि स्तनपान के जरिए आपके शिशु को विटामिन डी मिल सके।

विटामिन डी क्या होता है
विटामिन डी शरीर में पाए जाने वाला पोषक तत्व है जो शरीर को स्वस्थ रखने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका निर्माण शरीर में सेवन हाइड्रक्सी कोलेस्ट्रॉल और अल्ट्रावायलेट किरणों की मदद से होता है।
ठंड के दिनों में अपने शिशु को कुछ समय के लिए सूरज की किरणों में निकालें ताकि उसकी शरीर में अल्ट्रावॉयलेट किरणों की मदद से विटामिन डी का निर्माण हो सके। विटामिन डी मां के दूध में भी पाया जाता है इसीलिए स्तनपान के जरिए भी शिशु को विटामिन डी मिलता है।
अगर आप का शिशु आपके दूध पर निर्भर है तो अपने शरीर में विटामिन डी की कमी होने ना दीजिए। हमारे शरीर में कोलिकल कैसिरॉल नामक एक रसायन पाया जाता है, यह भी विटामिन डी की निर्माण में मदद करता है।

विटामिन डी क्या करता है
हमारे शरीर में विटामिन डी का मुख्य काम है कैल्शियम का निर्माण करना। जो कैल्शियम युक्त आहार हम ग्रहण करते हैं, उसमें से कैल्शियम को अवशोषित करने के लिए विटामिन डी मुख्य भूमिका निभाता है। विटामिन डी हमारी आंखों से कैल्शियम को अवशोषित कर के हड्डियों तक पहुंचाता है।
इतना ही नहीं, बल्किंग विटामिन डी हड्डियों में कैल्शियम को संचित करके रखने में भी मदद करता है। अगर शारीर में कैल्शियम की कमी होने लगे तो मांसपेशियों में दर्द भी होना शुरू होता है।

क्यों बच्चों के लिए जरूरी है विटामिन डी
जैसा कि मैंने आपको पहले बताया कि शिशु के जन्म के प्रथम कुछ वर्षों में उसका शरीर बहुत तेजी से विकसित होता है। जब शरीर विकसित होता है तो शरीर के बहुत सारे अंगों को विकसित होने के लिए प्रचुर मात्रा में कैल्शियम की आवश्यकता पड़ती है - उदाहरण के लिए बच्चे की दातों को, उसकी हड्डियों को इत्यादि। विटामिन डी बच्चों को निम्न तरीकों से स्वस्थ रखता है
- कैल्शियम और पोटैशियम शिशु की दातों को और हड्डियों को मजबूत बनाते हैं
- विटामिन डी शिशु के शरीर में मीनल के संतुलन को बनाता है और ब्लड क्लोटिंग को रोकने में भी सहायता करता है
- सही मात्र में विटामिन डी शिशु के हृदय व नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को ठीक रखता है
- विटामिन डी शरीर में इंसुलिन के सही स्तर को बनाए रखता है

शिशु को किन सोत्रों से विटामिन डी मिलता है
- बच्चों के लिए विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत आहार है। शिशु के आहार में डेयरी उत्पाद और अंडे का पीला हिस्सा भी कभी-कभी बिना चाहिए। इनमें प्रचुर मात्रा में विटामिन डी होता है।
- सूरज की रोशनी में शिशु का शरीर खुद-ब-खुद विटामिन डी का निर्माण करता है। इसके लिए जरूरी नहीं कि आप अपनी चीजों को कड़ी धूप में लेकर जाएं। लेकिन सुबह और शाम की हल्की धूप में आपको कुछ समय के लिए रख सकती है। इतना पर्याप्त है आपके शिशु के शरीर में विटामिन डी के निर्माण के लिए।
- शिशु को स्तनपान के जरिए मां के दूध से भी विटामिन डी मिलता है। जो बच्चे फार्मूला दूध पर आधारित हैं उन्हें फार्मूला दूध से विटामिन डी मिल जाता है। फार्मूला दूध का निर्माण किस तरह से किया जाता है जिससे शिशु के शरीर की पोषक तत्वों की सारी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

शिशु के शरीर में विटामिन डी से संबंधित सावधानियां
- जितना हो सके शिशु को पौष्टिक आहार खिलाए जिससे उसके शरीर की विटामिन डी की आवश्यकता पूरी हो सके।
- कोशिश करें कि शिशु के शरीर में कैल्शियम की मात्रा संतुलित रहे।
- हर दिन अपने बच्चे को कुछ समय के लिए धूप में खेलने दे
- अगर आपका शिशु 1 साल से छोटा है तो उसे आवश्यक रूप से स्तनपान कराएँ। स्तनपान शिशु के लिए सबसे बेहतरीन आहार है।

विटामिन डी से भरपूर आहार
- सॉल्मन और टुना फिश में प्रचुर मात्रा में विटामिन डी होता है। इसको खाने से शरीर में विटामिन डी की कमी पूरी होती है।
- अगर आप मछली नहीं खाती हैं तो कोई बात नहीं। आप अपने शिशु को ब्रेकफास्ट में या लंच में अंडा दे सकती हैं। अंडे का पीला हिस्सा विटामिन डी से भरपूर होता है।
- शिशु के शरीर में विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए डेयरी प्रोडक्ट भी बहुत अच्छे विकल्प है। डेरी प्रोडक्ट में सम्मिलित हैं गाय का दूध, पनीर, दही, मक्खन आदि।
- अक्सर देखा गया है कि लोग अपने बच्चों को जब दूध पीने के लिए देते हैं तो उसमें से मलाई निकाल देते हैं। आप ऐसा नहीं करें क्योंकि दूध में से मलाई निकाल देने के बाद दूध उतना स्वास्थ्यपर्द नहीं रह जाता है।
- कॉड लिवर में भी विटामिन डी बहुत प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
- गाजर भी शिशु के शरीर में विटामिन डी की कमी को पूरा करने में सहायक है। आप अपनी शिशु को खाने के लिए कच्ची गाजर को छीलकर दे सकती हैं, उसे गाजर का जूस पिला सकती हैं या गाजर को उबालकर के भी खिला सकती हैं।
- सोया उत्पाद में भी विटामिन डी पाया जाता है। आप अपने शिशु को सोया से बने आहार दे सकती हैं या सोया दूध भी पीने के लिए दे सकती हैं।
- अगर आप अपने शिशु को लंच बॉक्स में ब्रेड दे रही हैं तो ब्रेड में मक्खन लगा कर के दें क्योंकि मक्खन में भी विटामिन डी भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
- मशरूम भी एक बहुत ही स्वादिष्ट आहार है जिसमे विटामिन डी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

महिलाओं के शरीर में विटामिन डी की कमी के नुकसान
जो महिलाएं मोटापे से या ओबीसी थी से ग्रसित हैं उनकी शरीर में विटामिन डी का स्तर बहुत कम होता है।विटामिन डी की कमी से महिलाओं में निम्न प्रकार की शारीरिक समस्याओं होने की संभावना रहती है।
- जिन महिलाओं में विटामिन डी की कमी बढ़े हुए वजन की वजह से होता है वह महिलाएं अक्सर उदास और तनाव से ग्रसित रहती हैं।
- विटामिन डी की कमी से बिना वजह शरीर से पसीना आने की शिकायत होती है। अक्सर जब आप कोई शारीरिक श्रम करते हैं तब पसीना आना एक स्वभाविक बात है। लेकिन अगर बिना वजह के आपके शरीर से पसीना आए तो समझ लें की हो सकता है आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो रही है। ऐसी परिस्थिति में आप को तुरंत अपने शरीर में विटामिन डी की कमी की जांच करानी चाहिए।
- अगर आपको रहे मांसपेशियों में दर्द या हड्डियों में दर्द की समस्या हो तो भी आपको विटामिन डी की कमी की जांच करानी चाहिए। हड्डियों में दर्द विटामिन डी की कमी के लक्षण है।
- विटामिन डी की कमी शरीर को अंदर से कमजोर बनाता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है। अगर आपकी शरीर में विटामिन डी की कमी हो रही है तो संभावना है कि आप जल्दी-जल्दी बीमार पड़ेंगी हैं और मौसम के बदलाव के वक्त आसानी से कई प्रकार की बीमारियों की चपेट में आ जाती हैं।
- विटामिन डी की कमी से शरीर में एनर्जी की कमी होती है जिसकी वजह से अब दिन भर अपने आपको थका हुआ महसूस करेंगे तथा किसी भी काम को करने में आप का मन नहीं लगेगा।
- अगर आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो रही है तो यह भी संभावना है कि आप समय से पहले वृद्ध दिखाई देंगी। विटामिन डी की कमी से समय से पहले चेहरे और हाथों में झुर्रियां पड़ने लगती हैं।
- विटामिन डी की कमी की वजह से शरीर में ब्लड प्रेशर भी लगातार बढ़ा हुआ रहता है।
- विटामिन डी की कमी के कारण कई तरह के पाचन संबंधी बीमारियों का भी सामना करना पड़ता है।
- अगर आप में विटामिन डी की कमी है तो या तो आप मसूड़ों से संबंधित बीमारियों का सामना कर रही हैं या आने वाले समय में संभावना है कि आप मसूड़ों से संबंधित बीमारियों का सामना करें।
यह लेख बच्चों के स्वस्थ से सम्बंधित है लकिन यहाँ पे हमने महिलाओं के स्वस्थ से सम्बंधित जानकारी इस लिए दे रहर हूँ क्यूंकि विटामिन जितना जरुरी बच्चों के लिए है उतना ही जरुरी महिलाओं के लिए भी है।
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