
गर्भवती महिलाओं पर विटामिन ई के प्रभाव से संबंधित शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि विटामिन की कमी से बच्चों में मानसिक कौशल से संबंधित विकार पैदा हो सकती हैं।
शोध में यदि पता चला है कि विटामिन शिशु में लिखने का कौशल बढ़ाता है और भली पूर्वक तंत्रिका तंत्र का विकास करता है। शोध के नतीजों में यह भी पाया गया की गर्भधारण करने के 5 दिन के बाद अगर विटामिन ई सी कमियां होती हैं तो शिशु में कई प्रकार की विकृति पैदा हो सकती है - तथा गंभीर परिस्थितियों में गर्भ में शिशु की मृत्यु तक हो सकती है।
इस लेख में:
- उम्र के अनुसार विटामिन इ की आवश्यकता
- विटामिन ई की कमी से होने वाले नुकसान
- विटामिन इ से होने वाले फायदे
- शिशु के शरीर में विटामिन इ कमी के लक्षण
- क्यों शिशु के शरीर में विटामिन इ की कमी होती है
- आहार जिनसे शिशु को प्रचुर मात्रा में विटामिन मिलता है
- विटामिन इ की अधिकता भी शरीर के लिए अच्छी नहीं है
उम्र के अनुसार विटामिन इ की आवश्यकता

विटामिन ई की कमी से होने वाले नुकसान
- समय से पहले जन्मे प्रीमेच्योर बेबी में विटामिन इ की कमी के कारण रक्ताल्पता या एनेमिया (anemia) होने की संभावना बढ़ जाती है। यह स्थिति जानलेवा है इसीलिए जरूरी है कि पूरी सावधानी बरती जाए।
- बच्चों में और व्यस्त लोगों में विटामिन इ की कमी कारण उनके दिमाग के नसों का या न्युरोलोजीकल (neurological) अनेक प्रकार की जटिलताएं पैदा हो सकती हैं जो प्रभावित व्यक्ति के सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है।
- विटामिन इ की कमी वालों को भी प्रभावित करती है। शिशु के बाल तेजी से नहीं बढ़ते हैं तथा शिशु की त्वचा रूखी बनती है।
- विटामिन इ की कमी से शिशु की मांसपेशियां भी कमजोर होती है।
- विटामिन इ की कमी शिशु के प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है
- विटामिन ई की कमी शिशु की दृष्टि को भी प्रभावित करती है और आंखों की रोशनी को कम करती है।
विटामिन इ से होने वाले फायदे
- विटामिन इ (vitamin E) की कमी से नवजात शिशु में या प्रीमेच्योर बेबी में एनीमिया और इसी तरह की कई अन्य प्रकार की बीमारियां हो सकती है। विटामिन ए की खुराक शिशु को इन सभी प्रकार की बीमारियों से रक्षा करती है।
- विटामिन इ शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायता करता है।
- शरीर में कई महत्वपूर्ण अंगों को सुचारू रूप से काम करने में तथा स्वस्थ बनाए रखने में विटामिन ई बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जैसे कि यीशु की मांसपेशियां और टिशु (tissues)।
- छोटे बच्चों का मूड रह-रहकर के बदलता रहता है, कभी वे बहुत खुश होते हैं, तो कभी दूसरे ही पल आप उन्हें रोते हुए देख सकते हैं। इस तरह तुरंत तुरंत मूड बदलने की एक वजह हार्मोन में बदलाव भी है। विटामिन ई शरीर में हारमोंस के संतुलन को बनाए रखने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान देता है।
- शिशु के शरीर में विटामिन इ फैटी एसिड को भी नियंत्रित करने में मदद करता है।
- बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक तंत्र कमजोर होता है इस वजह से बच्चे जन्म के प्रथम कुछ वर्ष बार बार बीमार पड़ जाते हैं। लेकिन जैसे जैसे भी बड़े होते हैं उनके अंदर रोग प्रतिरोधक तंत्र मजबूत होता है और विकसित होता है। इस वजह से बड़े होने पर वे उतना बीमार नहीं पड़ते हैं जितना कि जब भी छोटे थे। विटामिन शिशु के शरीर में रोग प्रतिरोधक तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है। इसीलिए अगर शिशु के शरीर में विटामिन इ की कमी हो जाए तो शिशु के बार-बार बीमार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। शिशु के शरीर में अगर विटामिन इ की कमी है तो उसे किसी भी रोग का संक्रमण आसानी से लग सकता है।
- विटामिन ई की कमी से शिशु में मानसिक विकार भी पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है। यह बात अनेक प्रकार के शोध में प्रमाणित हो चुका है।
- व्यस्को के शरीर में विटामिन ई की कमी के कारण कई प्रकार की रोगों की संभावना बढ़ जाती है जैसे कि बचपन, नपुसंकता, आंतों में घाव और सूजन, गठिया, गंजापन, पीलिया, ह्रदय रोग तथा मधुमेह की बीमारी।
- विटामिन ई की कमी थायराइड ग्लैण्ड तथा पिट्यूटरी ग्लैण्ड की कार्यशैली में बाधा उत्पन्न कर सकता है।

शिशु के शरीर में विटामिन इ कमी के लक्षण
अगर शिशु के शरीर में विटामिन इ की कमी हो रही है तो उसे कई प्रकार की स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जिन बच्चों में विटामिन ई की कमी पाई जाती है उनमें अब निम्न लक्षण देख सकते हैं।
- शिशु का विकास ठीक तरह से नहीं होना या बहुत धीमी गति से विकास होना
- शिशु की मांसपेशियों का और हड्डियों का कम विकास होना
- जी मिचलाना
- गैस की समस्या और पाचन तंत्र से संबंधित समस्या
- पेट में ऐंठन और मरोडन
- दस्त
- थकान
- सिरदर

क्यों शिशु के शरीर में विटामिन इ की कमी होती है?
- अगर शिशु को लीवर से जुड़ी कोई स्वास्थ्य समस्या है जिसे कारण शिशु क शारीर आहार से पोषक तत्वों को ठीक तरह से अवशोषित नहीं कर पा रहा है तो विटामिन ई की कमी होने की संभावना बढ़ जाती है।
- अगर शिशु कम वसा वाले आहार ग्रहण करता है। शिशु के आहार में वसा उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की अन्य पोषक तत्व। आहार में मौजूद वसा शिशु के शरीर को कई प्रकार के पोषक तत्वों को अवशोषित करने में सहायता करता है। लेकिन अत्यधिक मात्रा में वसा का सेवन शिशु में मोटापा तथा अन्य प्रकार की बीमारियां भी पैदा कर सकता है। इसीलिए शिशु को वसा वाले आहार दें लेकिन उतनी ही मात्रा में दे जितना कि उसकी शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है।
- शिशु के शरीर में विटामिन इ की कमी की एक वजह कुपोषण भी है। अगर आपका शिशु भरपेट आहार ग्रहण तो करता है लेकिन उसे आहारों से अनेक प्रकार के पोषक तत्व नहीं मिल रहे हैं तो उसमें कुपोषण की संभावना बढ़ जाती है। आप अपने शिशु को कई प्रकार के आहार खिलाए तथा आहार में मौसम के अनुसार अनेक प्रकार के फल और सब्जियों को भी सम्मिलित करें। शिशु के शरीर को पोषक तत्व मुख्य सा फल और सब्जियों से ही मिलते हैं तथा अनाज से उसे भरपूर मात्रा में कैलोरीज और थोड़ी मात्रा में पोषण मिलता है।

आहार जिनसे शिशु को प्रचुर मात्रा में विटामिन मिलता है
- विटामिन इ युक्त वनस्पति तेल (वेजिटेबल आयल), प्रायः सभी प्रकार की वेजिटेबल ऑयल में विटामिन इ पाया जाता है।
- गेहूं और जौ
- हरी साग
- चना और सभी प्रकार के दाल
- खजूर
- ऐसा चावल जिसे पकाते वक्त मांढ (starch) नहीं निकाला गया है
- मक्खन, मलाई और दूध से बने उत्पाद जैसे दही, घी, दूध की आइसक्रीम
- शकरकंद
- अंकुरित अनाज जैसे कि अंकुरित चना
- विटामिन ई लगभग सभी प्रकार के फलों में पाया जाता है। फलों को उनके मौसम के अनुसार खाना ज्यादा फायदेमंद रहता है। क्योंकि हर मौसम में शिशु के शरीर में पोषक तत्त्व जैसे कि विटामिन की आवश्यकता बदलती रहती है। विभिन्न मौसम में उपलब्ध फल मौसम के अनुसार शिशु को पोषक तत्वों की आपूर्ति करते हैं।

विटामिन इ की अधिकता भी शरीर के लिए अच्छी नहीं है
विटामिन ई शिशु के स्वस्थ शरीर और स्वस्थ दिमाग के लिए बहुत आवश्यक है लेकिन इसकी अत्यधिक मात्रा हानिकारक भी हो सकती है।
जब शरीर को अत्यधिक मात्रा में विटामिन ई मिलता है तो शिशु के शरीर में मौजूद खून की कोशिकाओं पर असर पड़ता है जिससे खून का बहना प्रभावित होता है और इससे संबंधित बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है।

इसीलिए कभी भी अपनी शिशु को बिना डॉक्टर की सलाह के विटामिन ई कि सप्लीमेंट ना दें। लेकिन आप अपने शिशु को ऐसे आहार खिला सकती हैं जिस में प्रचुर मात्रा में विटामिन इ पाया जाता है।
जब शिशु ऐसे फल और सब्जियों को खाता है जिस में प्रचुर मात्रा में विटामिन इ होता है, तो शिशु का शारीर पाचन के दौरान केवल उतनी ही मात्रा में विटामिन ई अवशोषित करता है जितना कि शिशु के शरीर को और उसके दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है।
