
हाल ही में हुए एक अमेरिकी शोध में यह बात सामने आयी है की अगर बच्चे समय पे सोते हैं तो उन्हें मोटापा नहीं सताएगा।
इस लेख में आप पढ़ेंगे:
- ~~~#1^^^नियमित दिनचर्या का प्रभाव छोटे बच्चों पे@@@
- ~~~#2^^^नियमित दिनचर्या का पालन और मोटापा@@@
- ~~~#3^^^दिनचर्या का मूल्यांकन@@@
- ~~~#4^^^शोध का प्रकाशन@@@
- ~~~#5^^^चौंकाने वाले तथ्य@@@
- ~~~#6^^^सीख - Takeaway@@@
anchorlink[1]anchorclose नियमित दिनचर्या का प्रभाव छोटे बच्चों पे - Impact of routine in preschool children इस लेख में आप पढ़ेंगे:

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बच्चों को अगर छोटी उम्र से ही नियमित दिनचर्या का पालन करना सिखाया जाये तो आगे चलकर उसके बहुत फायदे हैं। न्यूयॉर्क में छपे अमेरिकी शोध पत्रिका में बताया गया की अगर बच्चे को हर दिन नियमित समय पे सुलाया गया, नियमित समय पे खिलाया गया और अगर बच्चा हर दिन नियमित समय पे खेलता-कूदता है तो ऐसे प्री-स्कूली बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर होता है।
anchorlink[2]anchorclose नियमित दिनचर्या का पालन और मोटापा (Following regular routine and obesity in children)

नियमित दिनचर्या का पालन करने वाले बच्चों में मोटापे की समस्या भी कम देखी गयी है। बच्चों की सेहत पे नियमित दिनचर्या का क्या असर पड़ता है इस विषय पे शोध अमेरिका के ओहियो स्टेट विश्वविद्यालय में किया गया। शोध की प्रमुख लेखक सारा एंडरसन ने अपने अध्यन में पाया की नियमित दिनचर्या का पालन करने का सबसे ज्यादा फायदा प्री-स्कूली आयु के बच्चों में होता है। उनके अनुसार बच्चों में दिनचर्या उनके बेहतर स्वास्थ्य विकास से जुड़ी होती है तथा यह बच्चों में मोटापाग्रस्त होने की संभावना को भी कम करती है।
anchorlink[3]anchorclose दिनचर्या का मूल्यांकन - Points focused in the study

शोध में तीन साल तक की आयु के 3000 बच्चों के दिनचर्या का मूल्यांकन किया गया। मूल्यांकन में जिन बातों का विश्लेषण गया वे थीं
- बच्चों का समय से सोने जाना
- समय से खाना खाना
- समय से खेलना
- निश्चित समय पे निश्चित अवधि के लिए (एक घंटे या कम) टीवी या फिल्म देखना
anchorlink[4]anchorclose शोध का प्रकाशन
शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने माता-पिता की रिपोर्ट से बच्चों के दो पहलुओं की तुलना की - आत्म-नियमन और समान उम्र। बच्चों की नियमित दिनचर्या का पालन करने से सम्बंधित इस शोध का प्रकाशन 'ओबेसिटी' नमक पत्रिका में किया गया।
anchorlink[5]anchorclose चौंकाने वाले तथ्य - Shocking revelations
शोध की प्रमुख लेखक सारा एंडरसन ने पाया की तीन साल की उम्र के जिन बच्चों को नियमित समय पे सोने में कठिनाई होती है उन बच्चों में 11 साल तक की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते मोटापे की संभावना दूसरे बच्चों से ज्यादा रहती है।

जो बच्चे एक नियमित समय का पालन करते हैं, हर दिन एक नियमित समय पे सोते हैं वे बच्चे असमय सोने वाले बच्चों की तुलन में ज्यादा अच्छी सेहत में पाए जाते हैं। उनमें मोटापे की सम्भावना काफी कम रहती है।
anchorlink[6]anchorcloseसीख - Takeaway
अगर आप अपने बच्चों की अच्छी सेहत चाहती हैं तो उन्हें नियमित दिनचर्या का पालन करना सिखाइये। नियमित दिनचर्या का पालन करना सिर्फ सेहत की द्रिष्टी से ही महत्वपूर्ण नहीं है वरन इससे कम उम्र से ही बच्चों में अनुशाशन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होती है।
अनुशाशन से सम्बंधित आप अपनी राय हमे निचे दिए comment box में दे सकते हैं।