बच्चों को बीमार न कर दे ज्यादा नमक और चीनी का सेवन

बच्चों में जरूरत से ज्यादा नमक और चीनी का सावन उन्हें मोटापा जैसी बीमारियोँ के तरफ धकेल रहा है| यही वजह है की आज हर 9 मैं से एक बच्चे का रक्तचाप उसकी उम्र के हिसाब से अधिक है| इसकी वजह बच्चों के आहार में नमक की बढ़ी हुई मात्रा|

obesety in Indian children

एक अंतराष्ट्रीय report की माने तो बाजार में मिलने वाले fast food मैं नमक और चीनी की मात्रा बच्चों के स्वस्थ्य के लिए चिंताजनक है। Fast food snacks में स्वाद अनुसार नमक और चीनी नहीं होता बल्कि उसकी मात्रा वैज्ञानिक तरीके से निर्धारित की जाता है। अंतराष्ट्रीय कम्पनियाँ अरबों रूपए खर्च करती हैं शोध पे क्योँकि fast food का व्यापर सालाना खरबों रुपयों का है। इन कंपनियों ने शोध में पाया है की नमक और चीनी की एक निश्चित मात्रा बच्चों के दिमाग पे और उनके सोचने-समझने की छमता पे इस तरह से असर डालता है की बच्चे उसके दीवाने हो जाते हैं और उन्हें fast food की लत सी लग जाती है। नमक और चीनी की यह मात्रा अंतराष्ट्रीय कम्पनियाँ के मुनाफे को कई गुना बड़ा रहा है। मगर यह मात्रा बच्चों के स्वस्थ पे बुरा असर भी डाल रही है।  

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अंतराष्ट्रीय स्वस्थ्य संघटनों द्वारा कराये गए शोध में यह बात सामने आयी है की fast food मैं मिलने वाली नमक और चीनी की मात्रा बच्चों के आहार सम्बन्धी व्यहार (behavior disorder) को इस तरह बदल के रख देती है की बच्चों को भविष्य में मोटापा, मधुमेह (diabetes) जैसे बीमारियोँ का खतरा बना रहता है। 

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बाजार में उपलब्ध, बच्चों को परोसे जाने वाले 10 में से 7 खानों (snacks) में नमक और चीनी की मात्रा चिंता जनक स्तर पे पायी गयी है। इसीलिए स्वस्थ्य संघटन अक्सर माँ-बाप को इस बात की सलाह देता है की snacks खरीदने से पूर्व पैकेटों पर छपी जानकारि (label) को ध्यान पूर्वक पढ़ें और समझें। 

Indian state wise obesety data

शोध में करीब 1000 बाजार में उपलब्ध खाने के पैकेटों पर छपी सामग्रियों के लेबल का विश्लेषण किया गया। स्टडी में पाया गया है की विश्व स्तर पे 2 से 5 साल के उम्र के 25 प्रतिशत बच्चे मोटापे के शिकार हैं। स्टडी में यह भी पाया गया है की ये बच्चे हर दिन प्रस्तावित नमक की मात्रा से ज्यादा लेते हैं। शोध में baby food, राइस केक, ड्राई फ्रूट्स, क्रैकर्स, योगर्ट, और ice-cream के मशहूर ब्रांड्स (popular brands) का अध्यन किया गया।  

इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन के अनुसार बच्चों के एक समय के आहार में 210 मिलीग्राम नमक से ज्यादा नहीं होना चाहिए। मगर अध्ययन के दौरान पाया गया की बच्चों के एक समय के आहार में औसतन 361 मिलीग्राम नमक होता है जो की बहुत ज्यादा है। शोध में यह भी पाया गया की बच्चों के खाने में 47 फीसदी कैलोरी चीनी से मिलती है जबकि चीनी से कुल एक तिहाई कैलोरी ही बच्चों को मिलनी चाहिए। 

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बच्चों में जरूरत से ज्यादा नमक और चीनी का सावन उन्हें मोटापा जैसी बीमारियोँ के तरफ धकेल रहा है। यही वजह है की आज हर 9 मैं से एक बच्चे का रक्तचाप उसकी उम्र के हिसाब से अधिक है। इसकी वजह बच्चों के आहार में नमक की बढ़ी हुई मात्रा। 

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