Category: टीकाकरण (vaccination)

शिशु के टीकाकरण से सम्बंधित महत्वपूर्ण सावधानियां

By: Vandana Srivastava | 5 min read

टीकाकरण बच्चो को संक्रामक रोगों से बचाने का सबसे प्रभावशाली तरीका है।अपने बच्चे को टीकाकरण चार्ट के अनुसार टीके लगवाना काफी महत्वपूर्ण है। टीकाकरण के जरिये आपके बच्चे के शरीर का सामना इन्फेक्शन (संक्रमण) से कराया जाता है, ताकि शरीर उसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सके।

शिशु के टीकाकरण

बच्चे भारत के भविष्य हैं। इनकी सुरक्षा करना हमारा दायित्व हैं। एक माँ होने के नाते आप की जिम्मेदारी बनती हैं की आप का बच्चा सभी रोगों से मुक्त रहे। 

रोगों से छुटकारा पाने के लिए टीका करण ही सबसे सुरक्षित अस्त्र हैं।यह आप के बच्चे के चारो तरफ एक सुरक्षा कवच बना देता हैं।  

इस लेख में आप सीखेंगे - You will read in this article

  1. SMS के जरिये टीके की जानकारी
  2. राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का उद्देश्य
  3. टीकाकरण चार्ट
  4. टीकाकरण का महत्व
  5. टीकाकरण के अलग-अलग प्रकार
  6. क्या टीकाकरण सुरक्षित है?
  7. टीकाकरण के  दुष्प्रभाव
  8. सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम
  9. बच्चों के टीकाकरण से जुड़ी महत्त्वपूर्ण बातें

  SMS के जरिये टीके की जानकारी - Upcoming vaccination schedule info through SMS

बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाने और उनको गंभीर जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए, स्वास्थ्यविभाग अब नवजात से लेकर हर बच्चे की सेहत को लेकर गंभीर है। 

टीकाकरण को लेकर नई व्यवस्था शुरू की गई है। इसके तहत यह जानकारी एसएमएस से मिल जाएगी कि अब आपके बच्चे को कौन सा टीका कब लगेगा। 

भारतीय शिशु अकादमी ने अप्रैल से टीकाकरण के लिए एसएमएस अलर्ट सेवा शुरू की है। इसके लिए लोगों को एक बार रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। 

इसके बाद बच्चे के टीकाकरण के लिए अकादमी या फिर राजस्थान हेल्थ विभाग की ओर से एसएमएस मिलते रहेंगे। इससे यह फायदा होगा कि बच्चे के टीकाकरण का समय तिथि नहीं भूल पाएंगे। 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस प्रक्रिया को बच्चों के लिए काफी महत्वपूर्ण पहल बताई गई है क्योकि माता-पिता भी इसके प्रति सजग होंगे तो बच्चों को गंभीर बीमारियों, कुपोषण से बचाया जा सकता है। 

राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का उद्देश्य - Aim of National Immunization Program (NIP)

टीकाकरण बच्चो  को संक्रामक रोगों से बचाने का सबसे प्रभावशाली तरीका है। प्रत्येक देश की अपनी टीकाकरण नीति होती है जो कि उसके पूरे स्वाबस्य्ली  कार्यक्रम का हिस्सा होती है। 

भारत में राष्ट्रीय कार्यक्रम का उद्देश्य  सभी शिशुओं को छः जानलेवा बीमारियों तपेदिक, पोलियो,  गलघोंटू,  काली खांसी,  टिटनेस और खसरे से सुरक्षा प्रदान करता है। 

बच्चे को खसरे के टीके के साथ विटामिन ए ड्रॉप्सा भी ली जाती है।  2002-2003 से देश के कुछ चुने हुए शहरों में हैपेटाइटिस बी के टीके को भी इस कार्यक्रम में शामिल कर लिया गया है।

इस कार्यक्रम के अन्तटर्गत एक वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों  को छः जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिये उनका टीकाकरण किया जाता है।

राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम

टीकाकरण चार्ट - Vaccination chart

अपने बच्चे को टीकाकरण चार्ट  के अनुसार टीके लगवाना काफी महत्वपूर्ण है। इससे यह भरोसा होता है कि आपका शिशु बहुत सी बीमारियों के प्रति यथासंभव सुरक्षित है। 

अगर, आपका  बच्चा थोड़ा बीमार है, तो भी ज्यादातर  डॉक्टर मानते हैं कि इसकी वजह से जरुरी टीका लगवाने में देरी नहीं करनी चाहिए।

टीकाकरण का महत्व - Importance of vaccination

आप के बच्चे के शरीर में इन्फेक्शन (संक्रमण) से बचने के लिए नेचुरल सुरक्षा होती है। इसे प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) कहा जाता है। 

जब आप के बच्चे के अंदर कोई इन्फेक्शन (संक्रमण) होता है, तो इससे लड़ने के लिए उसके शरीर मे  रसायनों का उत्पादन होता है, जिन्हें एंटीबॉडीज कहा जाता है।

इन्फेक्शन (संक्रमण) के ठीक होने के बाद भी ये एंटीबॉडीज हमारे शरीर में ही रहते हैं। ये हमें इन्फेक्शन (संक्रमण) पैदा करने वाले उस जीव के प्रति प्रतिरक्षित बना देते हैं। 

यह प्रतिरक्षण क्षमता थोड़े समय के लिए या फिर जिंदगी भर भी हमारे साथ बनी रह सकती है।

टीकाकरण के जरिये आपके बच्चे के शरीर का सामना इन्फेक्शन (संक्रमण) से कराया जाता है, ताकि शरीर उसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सके। कुछ टीके मौखिक रूप से दिए जाते हैं, वहीं कुछ अन्य इंजेक्शन के जरिये दिए जाते हैं।

टीके का फायदा यह है कि इन्फेक्शन ( संक्रमण) के प्रति प्रतिरक्षित होने के लिए हमें पूरी तरह बीमार होने की जरुरत नहीं है। 

हल्का संक्रमण होने से भी टीकाकरण के जरिये हम उसके खिलाफ प्रतिरोधक हो सकते हैं। इसी वजह से हम  लोग उसके बीमार होने से पहले ही उसके प्रति अलर्ट हो जाते हैं।

बाल्यावस्था  में टीकाकरण करवाने से शिशु अपनी जिंदगी के आरम्भ से ही संभवतया गंभीर बीमारियों से प्रतिरोधित हो जाता है।

टीकाकरण के अलग-अलग प्रकार - Vaccination differ from each other

टीकाकरण निम्नांकित तीन प्रकार का होता है:

  • प्राथमिक टीकाकरण: इसमें एक से लेकर पांच खुराकें शामिल हो सकती हैं। ये खुराकें शिशु के जन्म के समय शुरु होती हैं और उसकी जिंदगी के प्रारम्भ के  कुछ सालों तक जारी रहती हैं। ये शिशु के शरीर में किसी विशेष बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधक  क्षमता विकसित करती हैं। इन टीकों की सभी खुराकें लेना आवश्यक है।
  • बूस्टर टीकाकरण: बूस्टर खुराकें टीकाकरण के प्रभाव को बढ़ाने के लिए दी जाती हैं। जैसे-जैसे समय बीतता है, एंटीबॉडीज का स्तर कम होने लगता है। फलस्वरूप शरीर में बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। बूस्टर खुराक शरीर में एंटीबॉडीज का जरुरी स्तर बनाए रखती है।
  • सार्वजनिक टीकाकरण: किसी विशेष बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए इस तरह का टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जाता है। सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम अधिकतर सरकार द्वारा देश के बच्चों के स्वास्थ्य कल्याण के लिए चलाए जाते हैं।चेचक और हाल ही में पोलियो भी इस तरह के कार्यक्रमों के जरिये ही समाप्त हो पाएं हैं।

क्या टीकाकरण सुरक्षित है? - Is vaccination safe?

स्पेशलिस्ट का मानना है कि टीकाकरण आपके बच्चो के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। लगाने की मंजूरी देने से पहले टीकों की अच्छी तरह से जांच की जाती है। इन पर निंरतर निगाह रखी जाती है, ताकि यह निश्चित किया जा सके कि बीमारियों से  बच्चों की रक्षा करने के लिए ये पूरी तरह प्रभावी और सुरक्षित हैं।

टीकाकरण के  दुष्प्रभाव - Side affects of vaccination

टीकाकरण के बाद करीब 10 मिनट तक आपको चिकित्सक की देख- रेख में ही रहने के लिए कहा जा सकता है। यह इसलिए ताकि अगर बच्चे को इंजेक्शन के प्रति कोई रिएक्शन होता है, तो डॉक्टर तुरंत उसकी जांच कर सकें।

इंजेक्शन के जरिये दिए जाने वाले टीकों से शिशुओं और बच्चों को थोड़ी परेशानी हो सकती है। इससे वे चिड़चिड़े और अस्वस्थ महसूस कर सकते हैं। इंजेक्शन लगाई गई जगह अक्सर लाल और सूजी हुई हो जाती है। आपके बच्चे को हल्का बुखार भी आ सकता है।

अगर, बच्चे को काफी तेज बुखार हो ,तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर को दिखाएं।

कुछ विशेष टीके, जैसे कि एम.एम.आर. आदि लगने के सात से 10 दिन बाद भी बुखार या चकत्ते उभर सकते हैं। कुछ बच्चे टीके लगने के एक या दो दिन तक हल्के बीमार रह सकते।

इनमें से कई रोगों के मामलों में बचाव ही सबसे बेहतर उपचार है। इन रोगों के प्रति बच्चे को सुरक्षा प्रदान करने के लिए टीके लगवाना ही सबसे बढ़िया उपाय है। 

यही कारण है,

कि भारतीय सरकार भी बचपन में होने वाली कुछ सबसे आम और गंभीर रोगों के खिलाफ सभी बच्चों को टीके लगवाने की सलाह देती है।

सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम के तहत निम्नांकित रोगों के खिलाफ टीके लगाए जाते हैं

  • तपेदिक (टी.बी.)
  • डिप्थीरिया
  • काली खाँसी (पर्टुसिस)
  • पोलियो
  • खसरा (मीजल्स)
  • टिटनेस
  • हेपेटाइटिस बी
  • हेपेटाइटिस ए
  • मोतीझरा (टाइफाइड)
  • कंठमाला का रोग (मम्प्स)
  • रुबेला
  • जठरांत्र शोथ या गैस्ट्रोएंट्राइटिस (रोटावायरस)

आपके बच्चे को हरेक बीमारी के खिलाफ महत्त्वपूर्ण सुरक्षा के लिए एक ही टीके की कई खुराकें लेने की जरुरत हो सकती है। इसलिए यह बहुत जरुरी है कि बच्चे को टीकाकरण चार्ट के अनुसार टीके लगवाए जाएं।

समय -समय में नियमित रुप पर नए टीके आते रहते हैं और ये अक्सर उन्हीं पुराने रोग के लिए ही होते हैं।

आपको एक रोग के लिए दो अलग टीकों में से किसी एक का चुनाव करने या फिर दोनों टीके मिलाकर लगवाने के लिए कहा जा सकता है। 

उदाहरण के तौर पर आपके बच्चे को ओरल  पोलियो ड्रॉप्स और इंजेक्शन के जरिये पोलियो का टीका दोनों ही दिए जा सकते हैं। यह सब आपको काफी कंफ्यूज कर सकता है।

इसलिए, आप अपने अनुसार कोई भी टीका लगवाएं, आपके बच्चे को उस बीमारी के प्रति सुरक्षा अवश्य मिलेगी।

चुनाव के बारे में डॉक्टर से चर्चा करें और उसके बाद अपने परिवार की जरुरतों और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लें।

बच्चों के टीकाकरण से जुड़ी महत्त्वपूर्ण बातें - Important information related to vaccination 

  • टीकाकरण बच्चो को संक्रामक रोगों से बचाने का सबसे फायदेमंद तरीका है।
  • बच्चो को गंभीर रोग न हो उसके लिए सही समय पर टीके जरूर लगवाना चाहिए।
  • जब बच्चा गर्भ मे हो तो उस दौरान माँ को भी गर्भावस्थार के दौरान जल्द से जल्द टिटनेस टॉक्सागइड(टीटी) के  दो टीके लगाये जाने चाहिए।
  • बच्चे को दस्त  रोग हो तब भी पोलियो की खुराक अवश्य  पिलाना चाहिए।
  • बच्चो के माता-पिता को बतायें कि टीकाकरण कार्ड का क्या् महत्व है बच्चे को जब भी टीका लगवाने ले जाएं यह कार्ड साथ ले जाना न भूलें।

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